अलेक्सांद्र गोलित्सिन: अलेक्सांद्र प्रथम के शासन में रूसी साम्राज्य के चर्च और शिक्षा का नेतृत्व करने वाले समलैंगिक मंत्री

उन्नीसवीं सदी के शुरुआती रूसी मंत्री की कहानी, जिन्होंने रहस्यवाद को बढ़ावा दिया, बाइबिल प्रकाशित की और दरबार की समलैंगिकता-विरोधी साज़िशों का शिकार बने।

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शृंखला 🇷🇺 रूस का LGBT इतिहास
अलेक्सांद्र गोलित्सिन: अलेक्सांद्र प्रथम के शासन में रूसी साम्राज्य के चर्च और शिक्षा का नेतृत्व करने वाले समलैंगिक मंत्री

अलेक्सांद्र निकोलायेविच गोलित्सिन, सम्राट अलेक्सांद्र प्रथम के युग की सबसे प्रभावशाली और विवादास्पद हस्तियों में से एक थे। रूसी सम्राट के निकटतम मित्र और विश्वासपात्र रहे गोलित्सिन ने सांसारिक जीवन जीने वाले स्वतंत्र विचारक से शक्तिशाली सिनोड-पर्यवेक्षक और धार्मिक मामलों के मंत्री बनने तक का सफ़र तय किया। इस पद पर उन्होंने रूस में रहस्यवाद को बढ़ावा दिया।

इतिहास उन्हें सुधारक और बाइबिल सोसाइटी के संरक्षक के रूप में याद करता है। साथ ही, उनकी समलैंगिकता राजधानी की गपशप का प्रिय विषय और राजनीतिक साज़िशों का औज़ार बन गई थी।

बचपन और भावी सम्राट से मित्रता

अलेक्सांद्र निकोलायेविच गोलित्सिन का जन्म 8 दिसंबर 1773 को मॉस्को में हुआ। उनके पिता, गार्ड रेजिमेंट के कप्तान प्रिंस निकोलाय सेर्गेयेविच गोलित्सिन, एक समय महारानी अन्ना इयोआन्नोव्ना के प्रियपात्र बिरोन के उत्पीड़न का शिकार हुए थे और यारोस्लाव्ल में निर्वासन में रहे थे। बेटे के जन्म के दो सप्ताह बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। अलेक्सांद्र उनके तीसरे विवाह से जन्मे थे; उनकी माँ अलेक्सांद्रा अलेक्सांद्रोव्ना खित्रोवो थीं। मृत्यु से पहले पिता ने शिशु को परिवार के पवित्र अवशेष—संतों के अवशेषों वाला एक स्वर्ण क्रूस—से आशीर्वाद दिया। ज़ारिना नताल्या किरिल्लोव्ना नारीश्किना ने यह क्रूस उनके पूर्वज बोरिस अलेक्सेयेविच गोलित्सिन को 1682 के स्त्रेल्त्सी सैनिक विद्रोह के दौरान युवा ज़ार पीटर प्रथम की जान बचाने के लिए दिया था। यह धरोहर जीवन भर अलेक्सांद्र निकोलायेविच के साथ रही।

गोलित्सिन की माँ ने शीघ्र ही दूसरा विवाह कर लिया और पहले विवाह से हुए बेटे के प्रति उनका व्यवहार ठंडा था। प्रिंस की स्मृतियों के अनुसार, माता-पिता के घर में उन्हें “बहुत डराकर रखा जाता था।” माँ उन्हें एक जर्मन आया की देखरेख में छोड़ देती थीं, जो बेरहमी से कोड़े मारती थी। मारपीट का पता न चले, इसलिए वह “पीटने से पहले शरीर पर गीला कपड़ा लपेट देती थी।” माँ के जीवन से एक रहस्यमय पारिवारिक किंवदंती भी जुड़ी थी। एक बार प्रिंस चेगोदायेव ने भविष्यवाणी की थी कि वह दो बार विधुर पुरुषों से विवाह करेंगी, अंततः स्वयं विधवा होंगी और पहले विवाह से हुआ उनका बेटा राज्यसत्ता की ऊँचाइयों तक पहुँचेगा। यह भविष्यवाणी हूबहू पूरी हुई।

उस समय की प्रथा के अनुसार, गोलित्सिन का नाम शैशव में ही प्रतिष्ठित प्रेओब्राझेन्स्की गार्ड रेजिमेंट में सार्जेंट के रूप में दर्ज करा दिया गया था। तेरह वर्ष की आयु तक उन्होंने घर पर शिक्षा प्राप्त की और इतिहास, फ़्रेंच तथा इतालवी को विशेष पसंद किया। भावी मंत्री के जीवन में परिवार की संरक्षिका मारिया साव्विश्ना पेरेकुसिखिना ने निर्णायक भूमिका निभाई। वह कैथरीन द्वितीय की प्रिय कामर-फ़्राउ, यानी निजी कक्ष की सेविका थीं। इतिहासकार इलारियोन अलेक्सेयेविच चिस्तोविच के अनुसार, लड़के को देखकर उन्हें उससे स्नेह हो गया: “गोलित्सिन एक नन्हा, हँसमुख, प्यारा और चतुर लड़का था। उसमें अद्भुत अभिनय-क्षमता थी; वह हर लिंग और उम्र के लोगों की आवाज़, चाल और तौर-तरीकों की नकल कर सकता था।”

उनकी सिफ़ारिश और महारानी के व्यक्तिगत आदेश पर 1783 में लड़के को पेज कोर में प्रवेश मिला। युवा कुलीनों का यह सैन्य शिक्षण संस्थान उन्हें दरबारी और सैन्य सेवा के लिए तैयार करता था। कैथरीन के दरबार के साथ मिलकर इसने गोलित्सिन में आदर्श दरबारी के गुण विकसित किए: तीक्ष्ण बुद्धि, सामाजिक बातचीत की कला और नकल उतारने की असाधारण प्रतिभा। संस्मरणकार उनकी इस विलक्षण क्षमता को याद करते थे कि बगल के कमरे से सुनने पर उनकी आवाज़ उस व्यक्ति की आवाज़ से अलग नहीं पहचानी जा सकती थी जिसकी वह नकल कर रहे होते। सामाजिक रूप बदलने के इस हुनर का उपयोग वह हँसी-मज़ाक के लिए करते थे। समकालीन लोग उनके नाम एक साहसी शरारत भी जोड़ते थे: एक बार शर्त लगाकर उन्होंने पावेल प्रथम की चोटी खींच दी और सफ़ाई दी कि वह टेढ़ी पड़ी थी।

पढ़ाई के वर्षों में इस किशोर दरबारी पर ग्रैंड ड्यूकों के शिक्षकों का भी प्रभाव पड़ा: स्विस प्रबोधनवादी फ़्रेदेरिक-सेज़ार द ला आर्प (Frédéric-César de La Harpe) और धर्मशिक्षक आर्चप्रीस्ट आंद्रेय अफ़ानास्येविच साम्बोर्स्की। साम्बोर्स्की के विचार उदार और विभिन्न ईसाई संप्रदायों की एकता के समर्थक थे। वह विद्यार्थियों को अंग्रेज़ी पढ़ाते थे और आस्था के विषय में उनसे फ़्रेंच में पत्राचार करते थे।

युवा गोलित्सिन ने कैथरीन द्वितीय का वैभवशाली युग देखा। एक ऐतिहासिक प्रसंग प्रचलित है: सेनापति अलेक्सांद्र वासिल्येविच सुवोरोव को क्रिसमस की पूर्वसंध्या पर महारानी के साथ भोजन के लिए बुलाया गया, लेकिन धार्मिक नियम के अनुसार “पहला तारा निकलने तक” उपवास रखने के कारण उन्होंने खाने से इनकार कर दिया। महारानी ने एक पेज को बुलाकर हीरों से जड़े तारे के आकार का राजकीय अलंकरण मँगवाया और सुवोरोव को देते हुए कहा कि अब वह भोजन कर सकते हैं। वह पेज गोलित्सिन थे।

छुट्टियों और त्योहारों पर गोलित्सिन को शीतकालीन महल ले जाया जाता था, जहाँ वह बालक ग्रैंड ड्यूक अलेक्सांद्र और कोन्स्तान्तिन पावलोविच के साथ खेलते थे। दरबार के बंद, पुरुष-प्रधान सामाजिक वातावरण में भावी सम्राट अलेक्सांद्र प्रथम से पनपी यह मित्रता जीवन भर चली। अलेक्सांद्र पावलोविच स्वभाव से गोपनीय और संदेहशील थे, फिर भी गोलित्सिन पर उनका पूर्ण विश्वास था। 1806 में तनाव के बीच सम्राट की सुनने की क्षमता कम होने लगी, तो गोलित्सिन ने उनके साथ गुप्त रूप से बधिर लोगों की सांकेतिक भाषा सीखी, ताकि इशारों में उनसे संवाद कर सकें।

ऐतिहासिक साहित्य में कभी-कभी प्रिंस को उनके चचेरे भाई और हमनाम अलेक्सांद्र निकोलायेविच गोलित्सिन-मॉस्कोव्स्की समझ लिया जाता है। वह Casa rara, यानी “दुर्लभ वस्तु”, के उपनाम से जाने जाते थे और अपनी पत्नी मारिया ग्रिगोर्येव्ना व्याज़ेम्स्काया को ताश में काउंट लेव किरिल्लोविच रज़ुमोव्स्की के हाथों हारने के कारण प्रसिद्ध हुए। ये दो अलग-अलग व्यक्ति हैं।

अलेक्सांद्र निकोलायेविच गोलित्सिन का चित्र। गुस्ताव आडोल्फ़ हिप्पियुस, 1822। सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित “समकालीन” एल्बम से।

शुरुआती करियर और सम्राट के विश्वासपात्र

गोलित्सिन का करियर तेज़ी से आगे बढ़ा। 1791 में वह कामर-पेज और 1794 में प्रेओब्राझेन्स्की रेजिमेंट के लेफ़्टिनेंट बने। सैन्य सेवा में रुचि न होने के कारण उन्होंने नागरिक सेवा में स्थानांतरण करवाया और कामर-युंकर, यानी कनिष्ठ दरबारी, बन गए। इन्हीं वर्षों में वह युवा अलेक्सांद्र के confidant des amours—प्रेम संबंधों में विश्वासपात्र—बने, जिससे उनकी मित्रता और गहरी हुई।

1796–98 में गोलित्सिन ने दरबार में एक असामान्य भूमिका निभाई: वह सम्मानपूर्वक बंदी बनाकर रखे गए फ़ारसी राजकुमार मुर्तज़ा कुली ख़ान (Murtaza Qoli Khan) के साथ रहते थे। राजकुमार की मृत्यु के बाद गोलित्सिन को उनके कालीन और चाँदी के हथियार विरासत में मिले, और उच्च समाज में उनकी पहचान “फ़ारसी मामलों के विशेषज्ञ” की बन गई। 1807 में यह अनुभव काम आया। फ़्रांस और फ़ारस के बीच फ़िन्केनश्टाइन संधि होने के बाद युद्ध में व्यस्त अलेक्सांद्र प्रथम ने फ़ारसी मामलों का दायित्व गोलित्सिन को ही सौंपा।

1797 में पावेल प्रथम के राज्याभिषेक के समय गोलित्सिन को कामरगेर का ऊँचा दरबारी पद मिला। सिंहासन के उत्तराधिकारी से निकटता के कारण उनका करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा। 1798 के अंत में उन्हें “अशोभनीय आचरण” के लिए मॉस्को भेज दिया गया। संभव है कि यह उनकी तीखी ज़बान से आहत ईर्ष्यालु लोगों की साज़िश का परिणाम रहा हो। लेकिन जल्द ही उन्हें वापस बुला लिया गया और ऑर्डर ऑफ़ सेंट जॉन ऑफ़ जेरूसलम से सम्मानित किया गया। मॉस्को में अपने दो निर्वासन-कालों में प्रिंस ने एकांत जीवन बिताया, बहुत पढ़ा और प्रसिद्ध पुस्तकप्रेमी दिमित्री पेत्रोविच बुतुर्लिन तथा मेट्रोपोलिटन प्लातोन (लेवशिन) से संपर्क रखा। ये बातें उनके शुरुआती आध्यात्मिक अन्वेषण का संकेत देती हैं।

अलेक्सांद्र प्रथम के सम्राट बनने के बाद वह स्थायी रूप से राजधानी आ गए। सम्राट के प्रमुख विश्वासपात्र के रूप में गोलित्सिन ने स्वयं को आदर्श दरबारी सिद्ध किया। युवा ज़ार के निकट सहयोगियों के मंडल, अनौपचारिक समिति, के उदारवादियों के विपरीत वह सुधार-योजनाएँ सुनाकर सम्राट को थकाते नहीं थे, बल्कि सम्मानपूर्वक आदेश की प्रतीक्षा करते थे। समिति के सदस्यों ने व्यंग्य में उनका नाम Monarchique, यानी “राजतंत्रवादी”, रखा, क्योंकि गोलित्सिन निरंकुश राजसत्ता के समर्थक थे और उदार विचारों को “सरासर बकवास और आत्मा का पतन” मानते थे।

अलेक्सांद्र प्रथम उच्चाधिकारियों को इनकार पहुँचाने के लिए अक्सर गोलित्सिन का उपयोग करते थे, जिससे स्वयं व्यक्तिगत टकराव से बच जाते थे। प्रिंस भी इस राजनीतिक खेल में प्रसन्नता से भाग लेते थे। 1801 में गोलित्सिन ने ही सम्राट के पूर्व शिक्षक, “जैकोबिन” ला आर्प को मॉस्को में राज्याभिषेक में जाने से रोका। उसी समय उन्होंने धार्मिक प्रशासन के माध्यम से रज़ुमोव्स्की और व्याज़ेम्स्काया के विवादास्पद तलाक़ को स्वीकृति दिलाकर साज़िश में अपने कौशल का परिचय दिया।

बाद में भी वह उच्च कुलीनों के नाज़ुक मामले नियमित रूप से सुलझाते रहे। उन्होंने बिना हंगामे के सम्राट के प्रियपात्र अलेक्सेय आंद्रेयेविच अराकचेयेव और फिर 1818 में उनके सहायक प्योत्र आंद्रेयेविच क्लाइनमिखेल का तलाक़ करवाया; काउंट अलेक्सेय किरिल्लोविच रज़ुमोव्स्की के बदनाम बेटों को चर्च की जेलों में डलवाया; और 1812 में सम्राट की प्रेमिका मारिया अन्तोनोव्ना नारीश्किना के प्रिंस ग्रिगोरी इवानोविच गागारिन से संबंध के कांड को कुशलता से दबा दिया। 1820–21 में उन्होंने जनरल निकोलाय मिखाइलोविच बोरोज़्दिन और युद्धमंत्री अलेक्सांद्र इवानोविच चेरनिशोव के चर्चित तलाक़ों की देखरेख की। बोरोज़्दिन की पत्नी ने खुले तौर पर एक बंदी फ़्रांसीसी जनरल से संतान को जन्म दिया था।

1810 से गोलित्सिन शाही कैबिनेट का प्रबंधन करते थे। इसमें राजपरिवार के सदस्यों की अंत्येष्टि आयोजित करना और उनके अनुचर-दल बनाना शामिल था। शाही रंगमंच भी उनके अधीन थे। 1815 में उन्होंने ही दरबार को कात्तेरिनो कावोस (Catterino Cavos) का देशभक्तिपूर्ण हास्य-ओपेरा “इवान सुसानिन” मंचित करने की सलाह दी और उन अधिक उदास कथानकों से दूर रहने को कहा जो जली हुई मॉस्को की याद दिलाते थे।

1812 के देशरक्षात्मक युद्ध और उसके बाद 1813–14 में रूसी सेना के विदेशी अभियानों के दौरान अलेक्सांद्र प्रथम मोर्चे पर सेना के साथ थे। तब गोलित्सिन के हाथ में अपार सत्ता एकत्र हो गई। राज्य के सबसे महत्वपूर्ण मामले उन्हीं से होकर गुज़रते थे और मंत्रियों की समिति के साथ वह व्यावहारिक रूप से साम्राज्य की आंतरिक नीति चलाते थे।

निजी जीवन और समलैंगिकता

गोलित्सिन को दूसरी बार 1800 में मॉस्को निर्वासित किया गया। प्रिंस को फ़्रांसीसी अभिनेत्री लुईज़ शेवालिये (Louise Chevalier) से प्रेम हो गया था। वह काउंट इवान पावलोविच कुताइसोव की प्रियपात्र थीं और स्वयं सिंहासन के उत्तराधिकारी भी उनमें रुचि रखते थे। गोलित्सिन बार-बार उनके संबंध में हस्तक्षेप करते थे। उन्होंने अलेक्सांद्र से क़सम खाकर कहा कि यदि वह उनके और अभिनेत्री के बीच आए, तो वह उनकी आँखों के सामने ख़ुद को गोली मार लेंगे।

स्वीडिश राजदूत कुर्त फ़ॉन स्तेदिंग्क (Curt von Stedingk) ने स्टॉकहोम भेजी अपनी रिपोर्ट में व्यंग्य किया कि प्रेम चमत्कार कर देता है, क्योंकि इससे पहले प्रिंस महिलाओं में कोई रुचि नहीं लेते थे। राजनयिक ने कटाक्ष करते हुए यह भी लिखा कि विवाहित अभिनेत्री और गोलित्सिन के बीच अभी कई और लोग खड़े थे। इस कांड के कारण पावेल प्रथम ने गोलित्सिन को फिर मॉस्को भेज दिया।

सम्राट बनने पर अलेक्सांद्र प्रथम ने लुईज़ को रूस से निकाल दिया, गोलित्सिन को वापस बुलाया और उन्हें एक नाज़ुक काम सौंपा: पीटर्सबर्ग में रह गए अभिनेत्री के भाई, इक्कीस वर्षीय बैले नर्तक ओग्यूस्त पुआरो (Auguste Poirot), से उसकी बहन की साज़िशों का ब्यौरा पता करना। उन्हीं स्तेदिंग्क के अनुसार, अट्ठाईस वर्षीय गोलित्सिन, जो हाल तक अभिनेत्री के प्रेम में “मर रहे थे”, आश्चर्यजनक तेज़ी से सँभल गए और युवा नर्तक की घनिष्ठ मित्रता में सुख पाने लगे।

ओग्यूस्त पुआरो का चित्र। अज्ञात कलाकार, 1801।

रूसी साम्राज्य के उच्च वर्ग में विवाह सामान्य अपेक्षा था और प्रभावशाली अधिकारियों के निजी जीवन को राजनीति का विस्तार माना जाता था। फिर भी गोलित्सिन जीवन भर अविवाहित रहे और युवा पुरुषों से निकट संबंध बनाए रखे। संभव है कि ये लगाव पूरी तरह प्लेटोनिक रहे हों, या उन्हें इतनी सावधानी से छिपाया गया हो कि आज केवल पत्राचार, संस्मरण और अफ़वाहें ही उपलब्ध हैं।

समकालीन पश्चिमी इतिहासलेखन में, विशेषकर ब्रिटिश शोधकर्ता डैन हीली (Dan Healey) और अमेरिकी शोधकर्ता लॉरा एंगेलस्टीन (Laura Engelstein) के कार्यों में, गोलित्सिन की समलैंगिकता को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कारक माना जाता है। उन्नीसवीं सदी के शुरुआती रूस में क़ानून का क्रियान्वयन सामाजिक वर्ग के अनुसार होता था। आम लोगों पर पुरुषों के बीच यौन संबंध के लिए मुक़दमा चल सकता था, लेकिन उच्च कुलीन समाज में सार्वजनिक कांड न होने पर समलैंगिक संबंधों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई नहीं होती थी। सम्राट के असीम विश्वास के कारण गोलित्सिन क़ानूनी जोखिम से बाहर थे। उन्हें गोलित्सिन परिवार के उन दूसरे सदस्यों से अलग पहचानना भी ज़रूरी है जिनका उल्लेख बाद के एलजीबीटी इतिहास में आता है: दमन का शिकार हुए सोवियत अभिनेता येव्गेनी गोलित्सिन और दलबदलू अनातोली गोलित्सिन।

इतिहासकार यूरी येव्गेनेविच कोन्दाकोव का मानना था कि “सदोम के पाप पर विजय पाने के बाद गोलित्सिन ने अपने जीवन के उस पूरे दौर को मिटाने का प्रयास किया जब वह उसके अधीन थे… अपनी प्रवृत्ति को पापपूर्ण समझकर वह उसे छोड़ सके। दुर्भाग्य से समकालीन लोगों ने इस क़दम की क़द्र नहीं की और प्रिंस समलैंगिकता-विरोध का शिकार बने।” एक अन्य इतिहासकार, येव्गेनी यूर्येविच नाज़ारेन्को, ने लिखा कि गोलित्सिन की कुख्याति मुख्यतः सामाजिक और साहित्यिक मंडलों में गपशप के रूप में फैलती थी। फ़ोती को छोड़कर, प्रिंस के ऑर्थोडॉक्स विरोधियों ने आश्चर्यजनक रूप से खुले संघर्ष में इस तर्क का सहारा नहीं लिया।

संस्मरणकार फ़िलिप फ़िलिप्पोविच विगेल अपनी समलैंगिक प्रवृत्तियों के लिए प्रसिद्ध थे और समकालीन लोग इससे भलीभाँति परिचित थे। इसके बावजूद अपनी “टिप्पणियों” में उन्होंने गोलित्सिन का वर्णन खुले घृणाभाव से किया और कवि देनिस वासिल्येविच दावीदोव का यह मूल्यांकन उद्धृत किया:

“वह नीचता, कपटी साज़िशबाज़ी और उन विकृत रुचियों के लिए जाने जाते थे जो पूर्व में इतनी व्यापक हैं।”

— देनिस वासिल्येविच दावीदोव; फ़िलिप विगेल की “टिप्पणियों” से

एक समलैंगिक व्यक्ति की दूसरे के प्रति यह आक्रोशपूर्ण भाषा सामाजिक वर्ग और राजनीतिक मतभेदों की प्रधानता से समझी जा सकती है। प्रिंस की समलैंगिकता को “पूर्वी दुर्गुण” बताने की भाषिक युक्ति ओरिएंटलाइज़ेशन का उदाहरण है। समलैंगिक प्रेम को धुँधले, “असभ्य” पूर्व के खाते में डालकर रूसी कुलीन अपने ख़िलाफ़ लगने वाले आरोपों से दूरी बनाने का प्रयास करता था।

संस्मरणों में इस मूल्यांकन के साथ अलेक्सांद्र सेर्गेयेविच पुश्किन की प्रसिद्ध व्यंग्य-कविता “यह रहा ख्वोस्तोवा का संरक्षक…” भी आती है। लंबे समय तक इसे 1810 के दशक के अंत की रचना माना जाता था, लेकिन तात्याना ग्रिगोर्येव्ना त्स्याव्लोव्स्काया के पाठ-अनुसंधान ने ठोस रूप से सिद्ध किया कि कविता 1824 की गर्मियों में लिखी गई थी। यह मंत्री के राजनीतिक पतन पर तत्काल प्रतिक्रिया थी:

यह रहा ख्वोस्तोवा का संरक्षक, यह रही दास की आत्मा, शिक्षा का विनाशक, बान्तीश का संरक्षक! ईश्वर के लिए, टूट पड़ो उस पर चारों ओर से! पीछे से क्यों न आज़माएँ? वहीं तो वह सबसे कमज़ोर है।

— अलेक्सांद्र सेर्गेयेविच पुश्किन, 1824

“यह रहा ख्वोस्तोवा का संरक्षक” संप्रदाय की अनुयायी येकातेरीना फ़िलिप्पोव्ना तातारिनोवा का संदर्भ है। पुश्किन ने उन्हें पहले पति के उपनाम ख्वोस्तोवा की आड़ में संकेतित किया। “शिक्षा का विनाशक” कठोर सेंसरशिप का मूल्यांकन है। “बान्तीश का संरक्षक” इतिहासकार और अधिकारी दिमित्री निकोलायेविच बान्तीश-कामेन्स्की की ओर संकेत करता है, जो अपने समलैंगिक संबंधों के लिए जाने जाते थे और जिनकी गोलित्सिन रक्षा करते थे।

अंतिम पंक्तियों में दोहरे अर्थ हैं। राजनीतिक स्तर पर कवि गिरे हुए मंत्री पर अंतिम प्रहार करने का आह्वान करता है और उनके पास समर्थन न होने की ओर इशारा करता है। अंतर्निहित यौन अर्थ में यह गोलित्सिन की ग्रहणशील समलैंगिक भूमिका का स्पष्ट संकेत है। इस तरह उच्चाधिकारी का निजी जीवन उनके प्रतीकात्मक विनाश का औज़ार बन जाता है।

एक और मामला भी ज्ञात है। कवि निकोलाय मिखाइलोविच याज़िकोव ने 24 मई 1824 को अपने भाई अलेक्सांद्र मिखाइलोविच याज़िकोव को लिखे पत्र में पीटर्सबर्ग की एक अफ़वाह दर्ज की। इसके अनुसार, सम्राट के अनुरोध पर बान्तीश-कामेन्स्की ने राजधानी के “सदोमियों” की सूची बनाई थी, जिसमें गोलित्सिन भी शामिल थे:

“कहते हैं कि माग्नित्स्की ने अराकचेयेव और मेट्रोपोलिटन के साथ गोलित्सिन के विरुद्ध षड्यंत्र किया; वह काफ़ी समय से सक्रिय था और आख़िरकार सफल हो गया! इससे जुड़ा एक विवरण है, जो बहुत शिष्ट तो नहीं, लेकिन बड़ा रोचक है। कहा जाता है कि सम्राट ने प्रसिद्ध सदोमी बान्तीश-कामेन्स्की को बुलाया और इस विषय में उनके सभी परिचितों की सूची तैयार करने को कहा। बान्तीश-कामेन्स्की ने वह सूची प्रस्तुत की, जिसकी शुरुआत शिक्षा मंत्री से की; उसके बाद चांसलर का नाम था और इसी प्रकार आगे। इसके बाद उन्होंने सम्राट से एक और भेंट की और शपथ लेकर अपनी रिपोर्ट की सत्यता का विश्वास दिलाया।”

— निकोलाय मिखाइलोविच याज़िकोव, भाई को लिखा पत्र

इस कहानी की दस्तावेज़ी पुष्टि नहीं होती और सूची भी अब तक नहीं मिली है। फिर भी इससे पता चलता है कि गपशप कैसे “लिखित अफ़वाह” बनती थी और किसी को बदनाम करने के लिए समलैंगिकता का कैसे उपयोग होता था।

इंटरनेट पर विगेल की “टिप्पणियों” का एक और उद्धरण अक्सर मिलता है, जिसे ग़लती से गोलित्सिन से जोड़ दिया जाता है:

“उसके बारे में बिना शरमाए बात करना संभव नहीं; इससे अधिक कुछ नहीं कहूँगा। उसकी मूर्खता, नीचता और दुर्गुणों से इन पन्नों को गंदा नहीं करूँगा।”

— फ़िलिप फ़िलिप्पोविच विगेल, “टिप्पणियाँ”

वास्तव में ये शब्द प्रिंस गोलित्सिन के लिए नहीं, बल्कि विदेश मामलों के कॉलेजियम के अधिकारी बान्तीश-कामेन्स्की के लिए लिखे गए थे।

धार्मिक प्रशासन के प्रमुख

सिनोड के मुख्य सरकारी पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्ति

सितंबर 1802 में गोलित्सिन सीनेट के प्रथम विभाग के ओबर-प्रोक्यूरेटर नियुक्त हुए। 21 अक्टूबर 1803 को उन्हें पवित्र सिनोड का ओबर-प्रोक्यूरेटर बनाया गया—यानी चर्च की निगरानी करने वाला धर्मनिरपेक्ष सरकारी अधिकारी। नियुक्ति का पता चलने पर गोलित्सिन ने कहा:

“मैं कैसा ओबर-प्रोक्यूरेटर? मैं तो किसी चीज़ पर विश्वास ही नहीं करता!”

— अलेक्सांद्र निकोलायेविच गोलित्सिन

नया पद उन्हें “कब्र जैसी उदासी” से भर देता था और बिशप “अपने बेहद काले चोगों में डरावने संन्यासी” लगते थे। सम्राट अपने निर्णय पर अड़े रहे और साथ ही उन्हें स्टेट सेक्रेटरी, यानी अपने निजी प्रतिवेदक, का पद भी दिया। इससे गोलित्सिन को महाअभियोजक को बीच में लाए बिना सीधे ज़ार तक पहुँचने का अधिकार मिल गया, जो उनके असीम प्रभाव का आधार बना।

प्रिंस कूटनीतिक यात्राओं में अलेक्सांद्र के साथ जाते थे। 1808 की प्रसिद्ध एरफ़ुर्ट कांग्रेस में उनकी नेपोलियन बोनापार्ट (Napoléon Bonaparte) से बातचीत हुई। गोलित्सिन का उपनाम सुनते ही फ़्रांसीसी सम्राट ने पूछा, “वही, जो सिनोड में हैं?” (Celui du Synode?) इसके बाद उन्होंने पीटर प्रथम के चर्च-सुधारों पर चर्चा की और प्रशंसा की कि रूसी ज़ार ने पादरियों को राज्यसत्ता के अधीन कैसे कर लिया। सैन्य परेडों और नृत्य-समारोहों के बीच रूसी ओबर-प्रोक्यूरेटर ने यूरोपीय संस्कृति में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने फ़्रांसीसी अभिनेता फ़्राँस्वा-ज़ोज़ेफ़ ताल्मा (François-Joseph Talma) के अभिनय की प्रशंसा की, नए नेपोलियन दरबार के शिष्टाचार का ध्यान से अध्ययन किया और मार्शल ज़ाँ लान (Jean Lannes) से मित्रता की।

प्रशासक के रूप में गोलित्सिन ने अपने पूर्ववर्ती अलेक्सांद्र अलेक्सेयेविच याकोवलेव के समय भड़के विवादों को शांत किया, सिनोड के कार्यालय को अपने अधीन किया और चर्च के न्यायालयों तथा वित्त पर नियंत्रण स्थापित किया। लगभग चौदह वर्षों तक उन्होंने रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च को नियंत्रित किया—इस प्रशासन के पूरे इतिहास में सबसे लंबा कार्यकाल।

गोलित्सिन के शुरुआती निर्णयों में भविष्यवक्ता भिक्षु आवेल, जिनका सांसारिक नाम वासिली वासिल्येव था, को पीटर-पॉल क़िले से सोलोवेत्स्की मठ भेजना; पुराने धार्मिक अनुष्ठान मानने वाले मठाधीश सेर्गी की पुस्तक के प्रकाशन की अनुमति देना; और 1804 में लूथरन चर्च का विधान स्वीकृत करना शामिल था।

सुधारक मिखाइल मिखाइलोविच स्पेरान्स्की के साथ मिलकर ओबर-प्रोक्यूरेटर ने धार्मिक शिक्षण संस्थानों के व्यापक सुधार की योजना बनाई। सेमिनरियों के ख़र्च के लिए धन जुटाने को उन्होंने चर्च को पापमुक्ति की प्रार्थनाओं और अंत्येष्टि में मृतक के माथे पर रखी जाने वाली मुद्रित धार्मिक पट्टियों के प्रकाशन तथा बिक्री का विशेष अधिकार दिलाया। यह एकाधिकार विशाल आय देने लगा—लगभग एक लाख रूबल प्रति वर्ष। 1817 तक पर्याप्त पूँजी जमा हो गई और प्रिंस ने स्वयं सम्राट से बीस लाख रूबल का सरकारी अनुदान छोड़ने का प्रस्ताव किया। अलेक्सांद्र प्रथम अत्यंत प्रसन्न हुए।

चर्च-सुधारक निकोन से पहले के अनुष्ठानों को मानने वाले पुराने विश्वासियों के प्रति गोलित्सिन की नीति दोहरी थी। फ़रवरी 1812 में उन्होंने उन्हें अपने पादरी रखने की अनुमति दी। मॉस्को की आग के बाद उन्होंने ज़ार को बताया कि शहर के पुनर्निर्माण में पुराने विश्वासी सबसे अधिक सक्रिय हैं। गोलित्सिन की सलाह पर सम्राट ने उन्हें बनाए हुए प्रार्थनागृह रखने दिए और केवल घंटियाँ हटाने का आदेश दिया। दूसरी ओर, जून 1812 में ही मंत्री ने गवर्नरों को गुप्त परिपत्र भेजकर पुराने विश्वासियों की संख्या का अप्रकट लेखा रखने को कहा।

प्रिंस अलेक्सांद्र निकोलायेविच गोलित्सिन का चित्र। येगोर इवानोविच बोतमान, 1871।

आध्यात्मिक परिवर्तन

अपनी स्मृतियों के अनुसार, युवावस्था में धर्म प्रिंस को “घृणित” लगता था और वह ईसाई धर्म का मज़ाक उड़ाते थे। ओबर-प्रोक्यूरेटर बनने के शुरुआती वर्षों में उन्होंने सिनोड का संचालन “एक मूर्तिपूजक की कर्तव्यनिष्ठा” से किया। उन्हें सचमुच समझ नहीं आता था कि केवल भिक्षु ही बिशप क्यों बन सकते हैं। वह कहते थे, “यह नियम ज़रूर किसी नशे में धुत पैट्रिआर्क ने बनाया होगा।”

जल्द ही उनमें रहस्यवाद की रुचि शुरू हुई। इस परिवर्तन का प्रेरक उस फ़्रीमेसन रोदियोन अलेक्सांद्रोविच कोशेलेव को माना जाता है, जो डेनमार्क में राजदूत रह चुके थे। क्रांति-पूर्व इतिहासकारों का दावा था कि कोशेलेव ने प्रिंस को फ़्रीमेसन मंडली में प्रवेश दिलाया। समकालीन शोधकर्ता, विशेषकर नीना निकोलायेव्ना ज़ाज़ुलिना, इस बात से असहमत हैं। वे बताते हैं कि गोलित्सिन के किसी लॉज का सदस्य होने का प्रमाण नहीं है। इसके अलावा 1807 में स्वयं गोलित्सिन ने पोलिश गूढ़विद्या-साधक तादेउश ग्राब्यान्का (Tadeusz Grabianka) के मामले की जाँच की थी, जिन पर जासूसी और जादू के आरोप थे।

फिर भी कोशेलेव पीटर्सबर्ग के उच्च समाज में “आंतरिक ईसाई धर्म” के विचार लाए। यह आंदोलन बाहरी अनुष्ठानों से अधिक महत्व व्यक्तिगत भावसमाधि के अनुभव को देता था। गोलित्सिन पर फ़्राँस्वा फ़ेनलॉं (François Fénelon) और ज़ान गियों (Jeanne Guyon) के कैथोलिक क्विएटिज़्म, तथा याकोब बोमे (Jakob Böhme) और इमानुएल स्वीडनबोर्ग (Emanuel Swedenborg) के प्रोटेस्टेंट रहस्यवाद, दोनों का प्रभाव पड़ा। ईश्वर से अपने संबंध को उन्होंने इस तरह बताया: “सोच-विचार किए बिना हृदय से… ईश्वर की ओर मुड़कर उनकी दया माँगनी चाहिए, जैसे किसी राक्षस को देखकर बच्चा अपनी माँ की बाँहों में दौड़ जाता है।”

सेंट पीटर्सबर्ग में फ़ोंतान्का के तटबंध पर पी. वी. नेक्ल्युदोव का मकान। यह शाही दरबार के मंत्रालय की पूर्व इमारत है, जिसे “गोलित्सिन का मकान” भी कहा जाता है।

1812 में गोलित्सिन फ़ोंतान्का, संख्या 20 स्थित अपने मकान का पुनर्निर्माण करवा रहे थे। प्रिंस की इच्छा पर वास्तुकार अलेक्सांद्र लाव्रेन्त्येविच वितबर्ग ने घरेलू चर्च को रहस्यमय रूप दिया। उसमें दिन की रोशनी नहीं आती थी; प्रार्थना-कक्षों में ताबूत जैसी वस्तुएँ रखी थीं और दीपक हृदय के आकार के थे। इस वातावरण ने मकान के तहख़ानों में ख्लिस्ती संप्रदाय की भावसमाधि-सभाएँ होने की किंवदंतियाँ पैदा कीं। गोलित्सिन के विरोधी मेट्रोपोलिटन अम्व्रोसी (पोदोबेदोव) के जासूस इन्हें फैलाते थे।

फ़ोंतान्का स्थित गोलित्सिन के मकान का घरेलू चर्च, जिसे 1930 के दशक में नष्ट कर दिया गया। बीसवीं सदी की शुरुआत का फ़ोटोग्राफ़।

1812 की शरद ऋतु में मॉस्को पर क़ब्ज़े से फैली घबराहट के बीच अलेक्सांद्र प्रथम गोलित्सिन से मिलने आए। बातचीत के दौरान एक फ़्रांसीसी बाइबिल फ़र्श पर गिरी और दाऊद के नब्बेवें भजन पर खुल गई: “जो परमप्रधान की सहायता में निवास करता है…” गोलित्सिन ने इसे ईश्वरीय संकेत माना। इस घटना ने अलेक्सांद्र को गहराई से प्रभावित किया। हालाँकि शोधकर्ता यह संभावना मानते हैं कि प्रसंग गढ़ा गया हो या गोलित्सिन ने पुस्तक को जानबूझकर गिराया हो।

गोलित्सिन को अंतकाल-चिंतन, यानी शीघ्र प्रलय की अपेक्षा, में रुचि हो गई। इसमें उन्होंने जर्मन रहस्यवादी योहान हाइनरिख युंग-श्तिलिंग (Johann Heinrich Jung-Stilling) की गणनाओं का सहारा लिया। प्रिंस ईसाई एकता के दृढ़ समर्थक भी बन गए। उनका विश्वास था कि सभी ईसाई एक अदृश्य “आंतरिक चर्च” में एकजुट हैं और परंपरागत संप्रदायों का महत्व गौण है।

इतिहासकार इलारियोन अलेक्सेयेविच चिस्तोविच ने लिखा कि गोलित्सिन ने उच्च समाज में आस्था के प्रश्नों के प्रति रुचि जगाई। मॉस्को के मेट्रोपोलिटन फ़िलारेत (द्रोज़्दोव) ने मंत्री के धर्म को “धुँधला भावुक-रहस्यवादी रंग, जिसमें ऑर्थोडॉक्स सिद्धांत और विभिन्न विधर्मी तथा संप्रदायगत शिक्षाएँ मिली हुई हैं” बताया।

इतिहासकार मिखाइल याकोवलेविच मोरोश्किन ने और कठोर मूल्यांकन किया:

“यह अजीब और देखने में भला व्यक्ति, जिसने दरबारी विज्ञान की बारीकियों और छोटे-से-छोटे विवरण को सीख लिया था… धार्मिक विषयों में पूरा शिशु था, ऑर्थोडॉक्स धर्म में लगभग अज्ञानी और हर संप्रदायवादी के हाथ का दयनीय खिलौना।”

— मिखाइल याकोवलेविच मोरोश्किन, “रूस में जेसुइट”

लेखक और अधिकारी व्लादिमिर इवानोविच पानायेव गोलित्सिन की आस्था को सच्चा मानते थे:

“…वह आंतरिक उत्साह के कारण काम करते थे; शायद इसी से सीमा लाँघ जाते थे और अपने धार्मिक जोश की हद नहीं जानते थे। इसी कारण वह दूसरों की झूठी धर्मनिष्ठा पर विश्वास कर लेते थे और दुर्भाग्य से उनके हानिकारक प्रभाव के अधीन हो जाते थे।”

— व्लादिमिर इवानोविच पानायेव, “संस्मरण”

गोलित्सिन नियमित रूप से धार्मिक ठगों और अवसरवादी अधिकारियों के शिकार बनते थे। मिखाइल लेओन्त्येविच माग्नित्स्की इसका एक उदाहरण हैं। शुरुआत में उदारवादी रहे माग्नित्स्की वोलोग्दा निर्वासन के बाद ऑर्थोडॉक्स रूढ़िवादी बन गए। सिम्बीर्स्क के गवर्नर रहते हुए एक बार वह अपनी बग्घी से कीचड़ में कूद पड़े, ताकि किसी पवित्र उन्मत्त का आशीर्वाद ले सकें। उन्हें आशा थी कि इस घटना की चर्चा गोलित्सिन तक पहुँचेगी।

धार्मिक रूढ़ि से उनके विच्छेद का स्पष्ट उदाहरण “स्तानेविच मामला” था। साहित्यकार येव्स्ताफ़ी इवानोविच स्तानेविच ने रहस्यवाद की आलोचना में पुस्तक लिखी, तो सेंसर आर्चिमैन्ड्राइट इनोकेन्ती (स्मिर्नोव) ने उसके प्रकाशन की अनुमति दे दी। गोलित्सिन ने सेंसर को निर्वासित करवाया। वह इस बात से नाराज़ थे कि लेखक ने योहान्नेस क्रिसोस्तोम को “सिर्फ़ इसलिए प्राथमिकता दी क्योंकि वह पूर्वी चर्च के थे।”

धार्मिक मामलों और जनशिक्षा के मंत्री

1816 में गोलित्सिन जनशिक्षा मंत्री बने और 1817 में उन्होंने नए धार्मिक मामलों तथा जनशिक्षा मंत्रालय का नेतृत्व सँभाला। राजनीतिक लेखक अलेक्सांद्र स्कार्लातोविच स्तुर्द्ज़ा ने लिखा कि मंत्रालय “उनकी नाप का कपड़ा काटकर” बनाया गया था। एक धर्मनिरपेक्ष अधिकारी के अधीन ऑर्थोडॉक्स सिनोड, कैथोलिकों, प्रोटेस्टेंटों, मुसलमानों और मूर्तिपूजकों का प्रशासन जोड़ दिया गया। धर्मचिंतक आर्चप्रीस्ट गेओर्गी वासिल्येविच फ़्लोरोव्स्की के शब्दों में, इस विशाल योजना का उद्देश्य “आस्था, ज्ञान और सत्ता के बीच उद्धारकारी सहमति” बनाना था।

इस पद पर गोलित्सिन ने 1820 में रूस में एक संयुक्त इवैंजेलिकल-लूथरन चर्च की स्थापना करवाई। उन्होंने फ़िनिश ज़ाख़ारियास सिग्नेउस (Zacharias Cygnaeus) को पहला बिशप और इग्नात्स फ़ेसलर (Ignaz Aurelius Fessler) को उनका सहायक नियुक्त किया। 1819 से 1842 तक गोलित्सिन डाक विभाग के प्रमुख भी रहे। निजी पत्रों को गुप्त रूप से खोलकर पढ़ने की व्यवस्था नियंत्रित करने वाला यह व्यक्ति सबके मन में भय पैदा करता था।

बाइबिल सोसाइटी और पवित्र ग्रंथ का अनुवाद

गोलित्सिन सक्रिय रूप से रहस्यवाद को बढ़ावा देते थे। अलेक्सांद्र फ़्योदोरोविच लाब्ज़िन की पत्रिका “सियोन का संदेशवाहक” को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री स्वयं उसके सेंसर बन गए। 1820 में उन्होंने पश्चिमी रहस्यवादियों की रचनाओं के अनुवाद का आदेश दिया और पादरियों को बढ़ी हुई क़ीमतों पर उन्हें ख़रीदने के लिए बाध्य किया।

उनकी मुख्य परियोजना रूसी बाइबिल सोसाइटी रही। इसका प्रस्ताव ब्रिटिश पादरी जॉन पैटर्सन (John Paterson) और जनरल रॉबर्ट विल्सन (Robert Wilson) से आया था। ब्रिटिश सोसाइटी की स्थापना 1804 में मेथोडिस्टों और क्वेकरों ने पवित्र ग्रंथ सस्ते में वितरित करने के लिए की थी। गोलित्सिन ने यही विचार रूस में अपनाया।

रूसी बाइबिल सोसाइटी की पहली बैठक 11 जनवरी 1813 को प्रिंस के मकान में हुई। फ़रवरी 1816 में अलेक्सांद्र प्रथम ने पवित्र ग्रंथ का आधुनिक रूसी में अनुवाद आयोजित करने का आदेश दिया। सोसाइटी के कार्यकाल में पाठों का 41 भाषाओं में अनुवाद हुआ और कुल पाँच लाख से अधिक प्रतियाँ छपीं।

एर्ज़्या भाषा में लूका के सुसमाचार का शीर्षक-पृष्ठ। रूसी बाइबिल सोसाइटी का संस्करण, 1821।

ऑर्थोडॉक्स पादरियों का रोष इस बात से भड़का कि पुराने नियम का अनुवाद परंपरागत यूनानी सेप्टुआजिन्ट के बजाय प्राचीन हिब्रू मासोरेटिक पाठ से किया जा रहा था। उन्हें यह रूस को छिपे तौर पर प्रोटेस्टेंट बनाने का प्रयास लगा। गोलित्सिन की यह नीति पवित्र गठबंधन के संदर्भ में स्वाभाविक थी, जिसके वह वैचारिक समर्थक थे।

सफल परियोजनाओं में परस्पर शिक्षण पर आधारित लैंकेस्टर पद्धति के स्कूलों की शुरुआत भी थी। वे किसानों को बड़े पैमाने पर शिक्षित करने के लिए उपयुक्त थे।

शिक्षा का प्रशासन और सेंसरशिप

मंत्रालय का व्यवहार कठोर था। मिखाइल माग्नित्स्की, दिमित्री पावलोविच रुनिच और मिखाइल अलेक्सांद्रोविच कावेलिन जैसे अधिकारी “धर्मनिष्ठा की कमी” के लिए प्रोफ़ेसरों को निकाल देते थे। जर्मन लेखक आउगुस्त फ़ॉन कोत्सेबू (August von Kotzebue) की हत्या से भयभीत ज़ार के आदेश पर गोलित्सिन ने पीटर्सबर्ग विश्वविद्यालय पर दमन की पहल की। फिर भी उनके कार्यकाल में तीन विश्वविद्यालय—वारसॉ, खार्किव और पीटर्सबर्ग—तथा रिशेल्ये लिसेयुम खोले गए।

धर्मनिरपेक्ष सेंसरशिप ने प्राकृतिक विधि पर किताबें प्रतिबंधित कीं, जिनमें अलेक्सांद्र पेत्रोविच कुनित्सिन का ग्रंथ भी था। गोलित्सिन उपन्यासों को “पढ़ने के लिए हानिकारक” मानते थे। लेकिन “विल्ना विश्वविद्यालय मामले” में उन्होंने अधिकारी निकोलाय निकोलायेविच नोवोसिल्त्सेव की रिपोर्टों का सम्राट के सामने मज़ाक बनाया और फ़िलोमाथों की गुप्त संस्थाओं को इमानुएल कांट (Immanuel Kant) पर दार्शनिक बहसें बताकर प्रस्तुत किया। इससे कवि आदम मित्स्केविच (Adam Mickiewicz) साइबेरिया निर्वासन से बच गए। 1828 में गोलित्सिन ने “गाव्रीलियादा” के कारण पुश्किन को होने वाले निर्वासन से भी बचाया और जाँच को नौकरशाही की देरी में उलझा दिया।

संप्रदायों का संरक्षण और चुंबकवाद में रुचि

मंत्री संप्रदायों के प्रति आश्चर्यजनक सहिष्णुता दिखाते थे। 1819 में गवर्नर-जनरल मिखाइल आंद्रेयेविच मिलोरादोविच के भतीजे के स्कोप्त्सी संप्रदाय में जाने के कांड के बाद ही गोलित्सिन उसके नेता कोन्द्राती इवानोविच सेलिवानोव को निर्वासित करने पर राज़ी हुए।

वह येकातेरीना फ़िलिप्पोव्ना तातारिनोवा, जन्मनाम बुक्सगेव्देन (Buxhoeveden), के संप्रदाय के निकट थे। उसके भावावेशपूर्ण नृत्य मिखाइलोव्स्की महल में होते थे। पानायेव ने इसका वर्णन इस तरह किया:

“तातारिनोवा ने वहाँ एक विशेष प्रकार की उपासना स्थापित की थी, जिसमें पानी के बड़े टब के चारों ओर गिर पड़ने तक चक्कर लगाए जाते थे। कहा जाता था कि चक्कर लगाने वाले को भविष्यवाणी का वरदान मिलता है। चमत्कारों की ओर आकर्षित प्रिंस गोलित्सिन वहाँ जाते थे।”

— व्लादिमिर इवानोविच पानायेव, “संस्मरण”

1837 में संप्रदाय के ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई, तो प्रिंस ने कायरतापूर्वक कहलवा दिया कि उन्हें “इस महिला से परिचय बहुत मुश्किल से याद आता है।” 1820 के दशक के अंत में उन्हें चुंबकवाद और अन्ना पेत्रोव्ना ज़ुबोवा, जन्मनाम तुर्चानिनोवा, की उपचार-सभाओं में रुचि हो गई। वह पुलिसप्रमुख सेर्गेय अलेक्सांद्रोविच कोकोश्किन की बुआ थीं और “दृष्टि” से इलाज करती थीं। उपचार से लाभ नहीं हुआ; प्रिंस अंधे हो गए और अंतिम वर्षों में “अविवाहित युवती माउरर” के प्रभाव में आ गए।

सर्वशक्तिमान मंत्री का पतन: फ़ोती से संघर्ष

गोलित्सिन के प्रमुख अभियोगकर्ता आर्चिमैन्ड्राइट फ़ोती थे, जिनका सांसारिक नाम प्योत्र निकितिच स्पास्स्की था। शरीर पर तपस्या की लोहे की ज़ंजीरें पहनने वाले इस युवा, करिश्माई तपस्वी को अत्यंत धनी काउंटेस अन्ना अलेक्सेयेव्ना ओरलोवा-चेस्मेन्स्काया का संरक्षण प्राप्त था। इस कारण पीटर्सबर्ग के सामाजिक मंडलों में उनकी भारी लोकप्रियता थी। शुरुआत में मंत्री फ़ोती के अधीन रहते थे, उन्हें “अब्बा” कहते थे और विनम्रतापूर्वक उनके सामने झुकते थे।

गोलित्सिन का पतन अराकचेयेव, मेट्रोपोलिटन सेराफ़िम (ग्लागोलेव्स्की), फ़ोती और माग्नित्स्की की साज़िश का परिणाम था। फ़ोती की भूमिका निर्णायक रही। अपनी शिकायतों में वह गोलित्सिन के आसपास के लोगों को “चक्कर लगाने वाले ख्लिस्तियों का संप्रदाय” और “व्यभिचारी” कहते थे। धार्मिक विधर्म और यौन विचलन एक ही आरोप में मिला दिए गए।

अप्रैल 1824 में फ़ोती ने पादरी योहानेस गोस्नर (Johannes Gossner) की पुस्तकों के प्रकाशन का आरोप लगाकर मंत्री को आशीर्वाद देने से इनकार कर दिया और चिल्लाए, “तुम स्वर्ग का राज्य नहीं देखोगे और नरक में उतरोगे!” बीस दिन बाद गोलित्सिन को पद से हटा दिया गया। पानायेव के अनुसार, एजेंट गोस्नर की पुस्तक के छपे पन्ने गुप्त रूप से ख़रीद रहे थे:

“मेट्रोपोलिटन उनके [सम्राट के] पैरों पर गिर पड़े और प्रिंस गोलित्सिन को हटाने की माँग की। उनके अनुसार, गोलित्सिन का प्रशासन ऑर्थोडॉक्स चर्च को हिला रहा था।”

— व्लादिमिर इवानोविच पानायेव, “संस्मरण”

बाइबिल सोसाइटी बंद कर दी गई। रूढ़िवादी अलेक्सांद्र सेम्योनोविच शिश्कोव नए शिक्षा मंत्री बने। गोलित्सिन ने बदला लिया: उन्होंने ज़ार को दिमित्री निकोलायेविच ब्लुदोव को शिश्कोव का सहायक नियुक्त करने के लिए राज़ी कर लिया। ब्लुदोव युवावस्था में शिश्कोव पर तीखे व्यंग्य लिख चुके थे।

पद से हटने के बाद का जीवन और निकोलाय प्रथम के शासन में प्रभाव

1823 में गोलित्सिन ने अलेक्सांद्र प्रथम का वह घोषणापत्र तैयार किया था जिसमें कोन्स्तान्तिन पावलोविच के बजाय निकोलाय पावलोविच को सिंहासन देने का प्रावधान था। 1825 के दिसम्बरवादी विद्रोह के समय उन्होंने राजपरिवार की रक्षा की और काउंट इवान स्तेपानोविच लावाल (Jean-François de Laval de la Loubrerie) के घर से सेर्गेय पेत्रोविच त्रुबेत्स्कोय की लिखी विद्रोह-योजना स्वयं खोज निकाली।

जाँच आयोग के सदस्य के रूप में गोलित्सिन ने 39 दिसम्बरवादियों के लिए मृत्युदंड माँगा। उन्होंने गिरफ़्तार त्रुबेत्स्कोय को अपने भोजन का बचा हुआ हिस्सा खिलाया। त्रुबेत्स्कोय टूट गए थे और 79 लोगों के नाम बता चुके थे; उन्होंने प्रिंस के अपने तथा कोन्द्राती फ़्योदोरोविच रीलेयेव के साथ हुए आत्मीय संवाद याद किए। उसी समय प्रिंस को एक ठेठ जेसुइट की तरह भी वर्णित किया जाता था। उदाहरण के लिए, इवान अलेक्सांद्रोविच आन्नेन्कोव को बचपन से जानने के बावजूद उन्होंने कोई रियायत नहीं दी और पूछताछ में व्यवस्थित ढंग से प्रमाण इकट्ठे किए। अपने दो गिरफ़्तार भतीजों, अलेक्सांद्र और वलेरियान गोलित्सिन, की सहायता भी प्रिंस ने नहीं की।

निकोलाय प्रथम गोलित्सिन की प्रशासनिक दक्षता की क़द्र करते थे। डाक विभाग में वह गुप्त एजेंटों को नियंत्रित करते थे। 1830 के दशक में प्रिंस ने ज्ञापन देकर यूनियात ईसाइयों को बलपूर्वक ऑर्थोडॉक्स धर्म में लाने का प्रस्ताव किया। वर्षों बाद यह कठोर नीति 1839 की पोलोत्स्क परिषद में परिणत हुई, जिसने बिशप इओसिफ़ (सेमाश्को) के समर्थन से चर्च-यूनियन समाप्त कर दिया। ये दमनकारी उपाय गोलित्सिन के पुराने “दोहरे मंत्रालय” की धार्मिक सहिष्णुता के विपरीत थे। फिर भी निकोलाय के युग में सुरक्षा-तंत्र के वफ़ादार अधिकारी बन चुके प्रिंस नई नीति का लगातार समर्थन करते रहे।

1833 में गोलित्सिन ने संगीतकार अलेक्सेय फ़्योदोरोविच ल्वोव के नए राष्ट्रगान “ईश्वर, ज़ार की रक्षा करो!” का समर्थन किया। 1840 की सर्दियों में प्रिंस की चित्रकार कार्ल पावलोविच ब्र्युल्लोव से पहचान हुई। ब्र्युल्लोव का एमिली टिम्म (Emilie Timm) से तलाक़ चल रहा था और मामला गोलित्सिन के रिश्तेदार, ओबर-प्रोक्यूरेटर निकोलाय अलेक्सांद्रोविच प्रोतासोव, पर निर्भर था। ब्र्युल्लोव ने प्रिंस का प्रसिद्ध चित्र बनाया:

प्रिंस अलेक्सांद्र निकोलायेविच गोलित्सिन का चित्र। कार्ल पावलोविच ब्र्युल्लोव, 1840। राजकीय त्रेत्याकोव गैलरी।

क्रीमिया में अंतिम वर्ष

1829 में गोलित्सिन ने क्रीमिया में ज़मीन ख़रीदी। वास्तुकार फ़िलिप एल्सन (Philip Elson) और विलियम हंट (William Hunt) की योजना पर गास्प्रा में “अलेक्सांद्रिया” महल बनाया गया। 1842 में दृष्टिहीन वृद्ध प्रिंस वहीं रहने चले गए। उनकी बहन येलिज़ावेता निकोलायेव्ना कोलोग्रिवोवा उनकी देखभाल करती थीं। पड़ोस की येलिज़ावेता क्सावेर्येव्ना वोरोन्त्सोवा और सोफ़ीया बेर्कगाइम (Sophie de Berckheim) उन्हें यूजेन सू (Eugène Sue), ज़ोर्ज सैंड (George Sand) और ओनोरे द बालज़ाक (Honoré de Balzac) के उपन्यास पढ़कर सुनाती थीं।

1844 की शरद ऋतु में शल्यचिकित्सक व्लादिमिर अफ़ानास्येविच करावायेव ने 28 सेकंड में उनकी दृष्टि लौटा दी। प्रिंस को प्रकृति का आनंद लेने का अवसर मिला, लेकिन जल्द ही उन्हें मस्तिष्काघात हुआ और 22 नवंबर 1844 को उनकी मृत्यु हो गई—उनके उत्पीड़क माग्नित्स्की की मृत्यु से केवल एक दिन के अंतर पर। आधी सदी बाद गास्प्रा की इसी जागीर में लेव निकोलायेविच तोलस्तोय “हाजी मुराद” लिखेंगे।

गास्प्रा, क्रीमिया में प्रिंस गोलित्सिन का महल। फ़ोटोग्राफ़।

मृत्यु से पहले उन्होंने अपना अभिलेखागार नष्ट कर दिया और बिना सोने की सजावट वाला साधारण लकड़ी का ताबूत बनाने को कहा।

ऐतिहासिक महत्व

रूसी एलजीबीटी इतिहास में अलेक्सांद्र गोलित्सिन का विशेष स्थान है। उनका उदाहरण इस धारणा को चुनौती देता है कि समलैंगिकता, गहरी धार्मिक आस्था और रूढ़िवादी राजनीतिक विचारों के बीच टकराव अनिवार्य है। उनकी जीवनी दिखाती है कि साम्राज्यकालीन रूस में समलैंगिक लगाव सत्ता के सर्वोच्च स्तर तक पहुँचने और विशाल देश की आध्यात्मिक दिशा तय करने में बाधा नहीं था। प्रिंस अपने कुलीन दर्जे, आर्थिक स्वतंत्रता और सम्राट के निजी विश्वास पर निर्भर थे। दशकों तक इस आधार ने उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता सुनिश्चित की और निजी जीवन को सरकारी हस्तक्षेप से बचाए रखा। अतीत को आज समझने में इस उदाहरण का महत्व है: यह बताता है कि रूस का ऐतिहासिक अनुभव हाशियाकरण या उत्पीड़न की एकरेखीय कथा तक सीमित नहीं है। इसमें प्रभावशाली राजनेताओं के जीवन भी शामिल हैं, जिनका अंतरंग क्षेत्र तब तक स्वायत्त और बाहरी नियंत्रण से दूर रहा जब तक वह प्रतिद्वंद्वियों के राजनीतिक हितों से नहीं टकराया।

ओग्यूस्त पुआरो का आगे का जीवन

ओग्यूस्त पुआरो रूस में रहे और बैले-निर्देशक के रूप में सफलतापूर्वक काम किया। उन्होंने इवान इवानोविच वाल्बेर्ख और शार्ल दिदलो (Charles Didelot) के साथ तीस से अधिक प्रस्तुतियाँ तैयार कीं। बैले के इतिहासकार यूरी अलेक्सेयेविच बाख्रुशिन ने इस काल का ऊँचा मूल्यांकन किया और बैले-निर्देशक आदम पावलोविच ग्लुश्कोव्स्की ने पुआरो को प्रथम श्रेणी का नर्तक बताया। उनकी मृत्यु पीटर्सबर्ग में हुई—कुछ सूचनाओं के अनुसार, उसी वर्ष जब प्रिंस गोलित्सिन की मृत्यु हुई।

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