अमेरिका में एलजीबीटी कैथोलिक 40 साल बाद समलैंगिकता पर वेटिकन के पत्र के असर पर चर्चा कर रहे हैं

अमेरिका में एलजीबीटी कैथोलिकों के साथ काम करने वाले संगठन न्यू वेज़ मिनिस्ट्री ने 7 नवंबर 2026 को एक लेख प्रकाशित किया जिसमें समलैंगिक लोगों की आध्यात्मिक देखभाल पर वेटिकन के पत्र के असर पर बात की गई है। पत्र की 40वीं वर्षगांठ पर अमेरिकी संगठन DignityUSA ने चार चर्चाओं की एक शृंखला तय की। अंतिम ऑनलाइन बैठक 10 नवंबर को होगी।
आस्था के सिद्धांतों की देखरेख करने वाली वेटिकन की कांग्रेगेशन का पत्र 1 अक्टूबर 1986 का है। उस पर कांग्रेगेशन के प्रमुख कार्डिनल योसेफ़ राटसिंगर के हस्ताक्षर थे, जो बाद में पोप बेनेडिक्ट सोलहवें बने। पत्र 30 अक्टूबर को सार्वजनिक किया गया। हैलोवीन से ठीक पहले जारी होने के कारण इसे अनौपचारिक तौर पर “हैलोवीन पत्र” कहा जाने लगा। कांग्रेगेशन ने समान लिंग के व्यक्ति के प्रति आकर्षण को अपने आप में पाप नहीं माना, लेकिन उसे वस्तुनिष्ठ रूप से अव्यवस्थित और समान लिंग के लोगों के बीच यौन कृत्यों को नैतिक रूप से अस्वीकार्य बताया। पत्र ने समलैंगिक लोगों के खिलाफ हिंसा की भी निंदा की और चर्च की शिक्षाओं से हटने वाले संगठनों का समर्थन बंद करने को कहा।
DignityUSA की कार्यकारी निदेशक मैरिएन डडी-बर्क के अनुसार, पत्र आने के बाद धर्मप्रांतों ने एलजीबीटी समूहों को चर्च के परिसरों का इस्तेमाल करने से रोकना शुरू कर दिया। कुछ श्रद्धालुओं ने कैथोलिक चर्च छोड़ दिया, जबकि अन्य इन समूहों में काम करते रहे। रूढ़िवादी समाचार माध्यम LifeSiteNews ने न्यू वेज़ मिनिस्ट्री की वर्षगांठ शृंखला की आलोचना की और इसे समलैंगिक संबंधों पर कैथोलिक शिक्षाओं में बदलाव का प्रयास बताया।
मई में उरानिया ने वेटिकन के एक कार्यदल की रिपोर्ट पर खबर दी थी। उसमें दो विवाहित समलैंगिक कैथोलिक पुरुषों ने चर्च में अपने अनुभव साझा किए थे।


