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दिप्रिंट ने बताया कि कश्मीर में एलजीबीटी मुसलमान कैसे एक-दूसरे की मदद करते हैं

28 अक्टूबर 2026 को भारतीय समाचार वेबसाइट दिप्रिंट ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की कि भारत-प्रशासित कश्मीर के श्रीनगर में एलजीबीटी मुसलमानों को सोनज़ल वेलफेयर ट्रस्ट से कैसे मदद मिलती है। पत्रकार सागरिका किस्सू ने ट्रस्ट के संस्थापक ऐजाज़ अहमद बुंड और उनसे मदद माँगने वाले लोगों से बात की।

दिप्रिंट के अनुसार, कश्मीर के एलजीबीटी लोगों पर बुंड का सार्वजनिक वीडियो देखने के बाद स्थानीय लोगों ने उनसे संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने ट्रस्ट का इंस्टाग्राम खाता सबके लिए खोल दिया। रिपोर्ट छपने तक फ़ॉलोअरों की संख्या करीब एक हज़ार से बढ़कर छह हज़ार से ज़्यादा हो गई थी। कुछ लोगों ने जान-पहचान बढ़ाने या मदद माँगने के लिए लिखा। बुंड ने बताया कि उन्हें विरोध भरे संदेश और जान से मारने की धमकियाँ भी मिलीं।

दिप्रिंट से बात करने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि वह इस सवाल से जूझते हुए ट्रस्ट के पास गया कि क्या एक समलैंगिक पुरुष होते हुए भी वह अपनी मुस्लिम आस्था का पालन कर सकता है। उसके मुताबिक, बुंड से बातचीत ने उसे इन शंकाओं से उबरने में मदद की। वह आज भी दिन में पाँच बार नमाज़ पढ़ता है। बुंड ने एक और मामले के बारे में बताया जिसमें मदद माँगने वाले एक किशोर के पिता ने बेटे का यौन रुझान बदलने की कोशिश की। उन्हें चिंता थी कि उनके बेटे की शादी कैसे होगी।

ट्रस्ट का पंजीकरण 2017 में हुआ था। संगठन CREA के मुताबिक, यह परामर्श और कानूनी मदद देता है और लोगों को रोज़गार के हुनर सीखने में सहायता करता है। दिसंबर 2024 में ट्रस्ट ने श्रीनगर में बुंड की किताब Unlocking Closet का विमोचन किया। किताब कश्मीर के समलैंगिक पुरुषों, समलैंगिक महिलाओं और उभयलिंगी मुसलमानों के अनुभवों पर है।

उरानिया ने पहले एलजीबीटी मुसलमानों के संगठन अल-ग़ुरबा के एक केंद्र के खुलने की ख़बर दी थी। यह केंद्र दक्षिण अफ़्रीका के केप टाउन के एक उपनगर में है।

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