बेलारूस में एलजीबीटी लोगों के उत्पीड़न के 34 मामलों की जानकारी मानवाधिकार समूहों ने दी

मानवाधिकार समूह टीजी हाउस और प्रिज़्माटिका ने 27 अक्टूबर को बताया कि बेलारूस में एलजीबीटी लोगों का उत्पीड़न बढ़ा है। टीजी हाउस के अनुसार, उसने 2026 की शुरुआत से 34 मामले दर्ज किए। इनमें से 16 मामलों में ट्रांसजेंडर या नॉन-बाइनरी लोगों को निशाना बनाया गया।
पुलिस और केजीबी की कार्रवाइयों पर जारी बयान में काम और पढ़ाई की जगहों पर हिरासत, फ़ोन की तलाशी, डेटिंग ऐप पर फ़र्ज़ी प्रोफ़ाइल के ज़रिए जाल बिछाकर मिलने के लिए बुलाने और देश छोड़ चुके लोगों के रिश्तेदारों के घरों की तलाशी का ज़िक्र है। टीजी हाउस ने अलग से मुखबिर बनाने की छह कोशिशों की जानकारी दी। संगठन के मुताबिक़, सुरक्षा अधिकारियों ने लोगों पर दूसरे एलजीबीटी लोगों और उनके संपर्कों की जानकारी गुप्त रूप से देने का दबाव डालने की कोशिश की।
समूहों के अनुसार, तीन मामलों में प्रशासनिक अपराध संहिता के अनुच्छेद 19.16 के तहत उल्लंघन की रिपोर्ट तैयार की गई। अप्रैल में क़ानून पर हस्ताक्षर के समय बेलारूस के राष्ट्रपति के प्रेस कार्यालय ने इस प्रावधान को पारंपरिक मूल्यों की रक्षा के उपायों में गिना। 1 नवंबर को बेलारूस की विपक्षी नेता स्वेतलाना तिखानोव्स्काया की समानता मामलों की सलाहकार यूलिया मित्स्केविच ने इस प्रावधान को नियंत्रण का ज़रिया बताया और कहा कि दबाव उन लोगों पर भी पड़ रहा है जो सक्रियतावादी नहीं हैं।
उरानिया ने पहले बताया था कि समलैंगिक संबंधों, लिंग परिवर्तन, संतान न होने और बाल यौनाकर्षण के तथाकथित प्रचार से जुड़ा अनुच्छेद 19.16 19 जून को लागू हुआ।


