पनामा के अधिकार संगठन ने अंतर-अमेरिकी आयोग के समक्ष समलैंगिक परिवारों से भेदभाव का मुद्दा उठाया
पनामा के मानवाधिकार संगठन Fundación Iguales ने 30 अक्टूबर 2026 को पनामा सिटी में अंतर-अमेरिकी मानवाधिकार आयोग (CIDH) के सामने समलैंगिक परिवारों की कानूनी मान्यता में आने वाली समस्याएं रखीं। फाउंडेशन के बयान के अनुसार, प्रस्तुति आयोग के 197वें सत्र के दौरान नागरिक समाज के साथ संवाद में हुई।
फाउंडेशन का प्रतिनिधित्व कार्यकारी निदेशक और वकील इवान चानिस बाराहोना ने किया। वह Red de Litigantes LGBTI+ de las Américas की ओर से बोले, जो एलजीबीटी लोगों की अदालती सुरक्षा के लिए काम करने वाले वकीलों और संगठनों का नेटवर्क है। फाउंडेशन के अनुसार, नेटवर्क में लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई क्षेत्र के 14 से अधिक देशों के प्रतिनिधि हैं; Iguales बैठक के लिए चुने गए 20 संगठनों में था।
मुख्य शिकायत समान लिंग के जोड़ों के बच्चों का पंजीकरण न करने को लेकर है। चानिस के अनुसार, ऐसे मामलों में बच्चे की पनामा की नागरिकता तक पहुंच उसकी माताओं के यौन रुझान पर निर्भर बनाई जाती है। फाउंडेशन ने यह भी कहा कि सामाजिक बीमा सुधार में समान लिंग के जोड़ों को शामिल नहीं किया गया। ये आयोग के सामने रखे गए संगठन के आकलन हैं।
क्षेत्रीय हिस्से में नेटवर्क ने एलजीबीटी संगठनों के काम करने की जगह सिमटने, वित्तपोषण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर प्रतिबंधों तथा कलंकित किए जाने का मुद्दा उठाया। Fundación Iguales पनामा में कानूनी सुरक्षा, शिक्षा और एलजीबीटी लोगों की स्थिति पर काम करता है।
आयोग के आधिकारिक कैलेंडर में 30 अक्टूबर की बैठक को लैटिन अमेरिकी और कैरिबियाई संसद भवन में नागरिक समाज के साथ संवाद बताया गया है। अख़बार La Prensa ने पुष्टि की कि संगठनों ने वहां विभिन्न मानवाधिकार विषयों पर शिकायतें रखीं। Iguales का बयान आरोपों के गुण-दोष पर आयोग के किसी निर्णय की जानकारी नहीं देता।
कानूनी पृष्ठभूमि पनामा के आधिकारिक विधिक डेटाबेस में दर्ज है: 16 फ़रवरी 2023 को सर्वोच्च न्यायालय ने विवाह को पुरुष और महिला का संबंध बताने तथा समान लिंग के विवाह पर रोक लगाने वाले प्रावधानों को संवैधानिक माना। फाउंडेशन की प्रस्तुति ऐसे परिवारों की मान्यता पर जारी मतभेदों से संबंधित है।
उरानिया पहले बोलीविया में समान लिंग के नागरिक विवाह के पंजीकरण की ख़बर दे चुका है, जहां जोड़े ने प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रियाओं के ज़रिये मान्यता मांगी थी।


