दक्षिण अफ्रीका में एलजीबीटी और धर्मशास्त्र पर अफ्रीकी शोध समूह बनाने की योजना
दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में 14 से 16 अक्टूबर 2026 तक हुई धर्मशास्त्रीय शिक्षा संबंधी बैठक के प्रतिभागी क्वीयर धर्मशास्त्र पर एक अफ्रीकी शोध समूह के गठन की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमत हुए। बैठक आयोजित करने वाली और एलजीबीटी आस्थावानों का समर्थन करने वाली संस्था Inclusive and Affirming Ministries (IAM) ने 29 अक्टूबर की रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
“एक क्वीयर अफ्रीका की कल्पना” विषय पर बैठक प्रिटोरिया विश्वविद्यालय के Future Africa परिसर में हुई। IAM के अनुसार, इसमें विभिन्न अफ्रीकी देशों के चर्च नेताओं, धर्मशास्त्रियों, शोधकर्ताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। चर्चा धर्मशास्त्रीय शिक्षा में एलजीबीटी लोगों के स्थान पर केंद्रित थी।
प्रतिभागियों ने चर्चों, अकादमिक जगत और नागरिक संगठनों के अनुभव साझा किए, फिर शोध, पाठ्यक्रम और संभावित साझा परियोजनाओं पर चर्चा की। IAM के अनुसार एक संचालन समिति ने शोध समूह के गठन की प्रक्रिया का मार्गदर्शन करने की इच्छा जताई।
अन्य विचारों में क्वीयर धर्मशास्त्र पर पॉडकास्ट और आध्यात्मिक देखभाल, आस्थावानों के कल्याण तथा स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखने वाले धर्मशास्त्र पर सामग्री शामिल है। रिपोर्ट शुरुआती कदमों का वर्णन करती है; इसमें समूह या पॉडकास्ट शुरू होने अथवा नए पाठ्यक्रमों की मंज़ूरी की घोषणा नहीं की गई है।
IAM दक्षिण अफ्रीका की संस्था है जो धार्मिक समुदायों के साथ यौन रुझान और जेंडर के मुद्दों पर काम करती है। उसकी 25वीं वर्षगाँठ पर MambaOnline की रिपोर्ट के अनुसार, इसकी स्थापना 1995 में Gay and Lesbian Christian Outreach के नाम से हुई और 2001 में इसने वर्तमान नाम अपनाया।
क्वीयर धर्मशास्त्र एलजीबीटी अनुभवों और लिंग व यौनिकता संबंधी धारणाओं के विश्लेषण के ज़रिए आस्था, पवित्र ग्रंथों और धार्मिक परंपराओं का अध्ययन करता है। यूरेनिया पहले इस क्षेत्र के मुख्य दृष्टिकोण समझा चुका है।


