ब्रिटिश संसद ने एलजीबीटी लोगों के ख़िलाफ़ कन्वर्ज़न प्रथाओं पर रोक के मसौदे पर चर्चा की
ब्रिटिश संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समिति ने 29 अक्टूबर 2026 को लंदन में यौन अभिविन्यास या ट्रांसजेंडर पहचान बदलने के उद्देश्य वाली कन्वर्ज़न प्रथाओं पर प्रतिबंध के मसौदे को लेकर सार्वजनिक सुनवाई की। उसी दिन सरकार ने इस सवाल का जवाब भी प्रकाशित किया कि प्रस्तावित कानून शिक्षकों को कैसे प्रभावित करेगा।
वेस्टमिंस्टर पैलेस में बैठक के कार्यक्रम के अनुसार, इसमें एलजीबीटी संगठनों Stonewall और Galop, Ban Conversion Practices Coalition तथा Gay Men’s Network, Sex Matters और LGB Alliance के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मसौदे पर इन प्रतिभागियों के अलग-अलग विचार हैं।
हाउस ऑफ़ कॉमन्स की निर्दलीय सांसद रोज़ी डफ़ील्ड ने 22 अक्टूबर को पूछा था कि किसी शिक्षक का विद्यार्थी के सामाजिक जेंडर ट्रांज़िशन का समर्थन करने से इनकार करना क्या प्रस्तावित प्रतिबंध के दायरे में आएगा। 29 अक्टूबर के लिखित उत्तर में समानता मामलों के कनिष्ठ मंत्री साइमन लाइटवुड ने कहा कि मसौदा केवल विचार और विश्वास व्यक्त करने या स्पष्टीकरण के लिए बातचीत करने को अपराध नहीं बनाएगा। उनके अनुसार, यह माता-पिता को बच्चों की परवरिश से जुड़े फैसले लेने से भी नहीं रोकेगा। उन्होंने स्कूलों को सरकारी दिशानिर्देश Keeping Children Safe in Education का पालन करने को कहा।
सरकार की ओर से प्रकाशित मसौदा इंग्लैंड और वेल्स के लिए है। इसमें ऐसे कामों पर आपराधिक सज़ा प्रस्तावित है जिनका उद्देश्य यौन अभिविन्यास या ट्रांसजेंडर पहचान बदलना हो, जो दुर्व्यवहार हों और स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचाएँ, या ऐसा गंभीर भय या कष्ट पैदा करें जो रोज़मर्रा के जीवन को काफ़ी प्रभावित करे। प्रस्तावित अधिकतम सज़ा पाँच साल की जेल है। मसौदे में अदालत के संरक्षण आदेशों का प्रावधान भी है।
हिंसा का सामना करने वाले एलजीबीटी लोगों की सहायता करने वाला संगठन Galop प्रतिबंध का समर्थन करता है, लेकिन मसौदे में बदलाव ज़रूरी मानता है। 20 अक्टूबर की अपनी टिप्पणी में उसने मौजूदा कानून की कमियों और एलजीबीटी लोगों के अधिक व्यापक संरक्षण की ज़रूरत का ज़िक्र किया।
जैविक लिंग के आधार पर अधिकारों की वकालत करने वाला संगठन Sex Matters सरकारी आश्वासनों को पर्याप्त नहीं मानता। 20 अक्टूबर के लेख में उसने माता-पिता और शिक्षकों के लिए स्पष्ट अपवाद न होने की बात कही। संगठन को आशंका है कि अस्पष्ट भाषा के चलते सामान्य पारिवारिक या पेशेवर बातचीत पर भी जाँच हो सकती है।
दस्तावेज़ अभी मसौदा है और कानून के रूप में औपचारिक रूप से पेश किए जाने से पहले संसदीय जाँच में है। समिति 16 नवंबर 2026 तक लिखित सामग्री स्वीकार कर रही है और उसे 22 जनवरी 2027 तक रिपोर्ट देनी है।
उरानिया इससे पहले LGB Alliance से मुलाकात के बाद इसी मसौदे की आलोचना करने वाले ब्रिटिश कंज़र्वेटिव सांसद रिचर्ड फ़ुलर के बयान पर ख़बर प्रकाशित कर चुका है।


