अमेरिका में सर्वे का जवाब देने वाले 76% एलजीबीटी केंद्रों ने धमकी या उत्पीड़न की सूचना दी
अमेरिकी शोध संगठन Movement Advancement Project (MAP) और एलजीबीटी सामुदायिक केंद्रों के नेटवर्क CenterLink ने 15 अक्टूबर 2026 को एक नए सर्वे के नतीजे जारी किए। संबंधित सवाल का जवाब देने वाले केंद्रों में से 76% ने बताया कि सर्वे से पहले के दो वर्षों में उन्हें एलजीबीटी विरोधी धमकियों या उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। अध्ययन में संगठनों की वित्तीय कठिनाइयों और उनकी जारी सेवाओं का भी विवरण है।
रिपोर्ट की पद्धति के मुताबिक, अप्रैल में 356 केंद्रों को प्रश्नावली भेजी गई थी। 39 राज्यों, डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया और प्यूर्टो रिको के 175 संगठनों ने हिस्सा लिया; 147 ने पूरी प्रश्नावली भरी। धमकियों वाले सवाल का जवाब 156 केंद्रों ने दिया और 76% का आंकड़ा इसी समूह से संबंधित है। ये नतीजे सर्वे में शामिल केंद्रों का वर्णन करते हैं; इन्हें अपने-आप देश के सभी एलजीबीटी केंद्रों पर लागू नहीं किया जा सकता।
सवाल में अलग-अलग स्थितियां शामिल थीं: अपमानजनक चिट्ठियां और फोन कॉल, तोड़फोड़, विरोध प्रदर्शन, ऑनलाइन बैठकों में व्यवधान और सोशल मीडिया पर उत्पीड़न। ये अनुभव खुद संगठनों ने बताए हैं। लेखक कई मामलों को राजनीतिक बयानबाजी और ट्रांसजेंडर लोगों तथा युवाओं के कार्यक्रमों से जोड़ते हैं; उनके आकलन में सुरक्षा उपाय बढ़ाने के लिए अतिरिक्त धन की जरूरत है।
MAP के नतीजों के सारांश के अनुसार, भाग लेने वाले केंद्र मिलकर हर सप्ताह 29 हजार से अधिक लोगों को सेवाएं देते हैं। संबंधित सवालों के जवाब देने वाले केंद्रों में से 66% सीधे शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य या हिंसा से निपटने में सहायता की सेवाएं देते हैं। लेखकों ने कर्मचारियों और धन की कमी को केंद्रों के काम में बाधा बताया है।
इस सवाल का जवाब देने वाले 58% केंद्रों को सरकारी अनुदान मिलता है; उनकी बताई कुल राशि 12 करोड़ 40 लाख डॉलर से अधिक है। हालांकि, संगठनों ने इस धन तक पहुंच में कठिनाइयां बताई हैं। MAP और CenterLink ने निजी दानदाताओं, फाउंडेशनों और सरकारी संस्थाओं को केंद्रों के लिए दीर्घकालिक सहायता बढ़ाने की सिफारिश की है। यह अध्ययन के लेखकों की सिफारिश है।
अलग-अलग संगठनों के अनुभव भिन्न हैं। डेलावेयर राज्य में Sussex Pride के कार्यकारी निदेशक डेविड मेरिनर ने Washington Blade को बताया कि उनके संगठन को उत्पीड़न वाले फोन कॉल और संदेश मिले, लेकिन हिंसा की धमकियां नहीं मिलीं। Sussex Pride सर्वे में शामिल नहीं हुआ: मेरिनर ने कहा कि वे तय समय तक प्रश्नावली पूरी नहीं कर पाए थे।
रिपोर्ट हर दो वर्ष में प्रकाशित होती है; यह श्रृंखला 2008 में शुरू हुई थी। लेखक आगाह करते हैं कि हर संस्करण में भाग लेने वाले केंद्र बदलते हैं, इसलिए नतीजों की सीधी तुलना नहीं करनी चाहिए। इन आंकड़ों से यह तय नहीं किया जा सकता कि पूरे देश में धमकियों की आवृत्ति कितनी बढ़ी या घटी है।


