समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने वाले देशों के संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में चुनाव पर आलोचना

मानवाधिकार संगठन African Human Rights Coalition (AHRC) ने 13 अक्टूबर 2026 को न्यूयॉर्क में हुए चुनाव में बुरुंडी, घाना, नाइजीरिया और ज़ाम्बिया के संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में चुने जाने की आलोचना की। अपने बयान में संगठन ने कहा कि इन देशों में सहमति से होने वाले समलैंगिक यौन संबंध अब भी आपराधिक दंड के दायरे में हैं।
संयुक्त राष्ट्र के अभिलेखों के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से 31 दिसंबर 2029 तक के कार्यकाल के लिए कुल 15 देश चुने गए। पाँचों क्षेत्रीय समूहों में उम्मीदवारों की संख्या रिक्त सीटों के बराबर थी: आधिकारिक सूची में 15 सीटों के लिए 15 उम्मीदवार थे। महासभा ने गुप्त मतदान किया।
AHRC की कार्यकारी निदेशक मेलानी नेथन ने कहा कि समलैंगिक संबंधों के लिए दंड देने वाली सरकारों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों की रक्षा का जिम्मा सौंपना उन्हें अस्वीकार्य लगता है। उनके अनुसार परिषद की सदस्यता से घरेलू नीतियों को वैधता मिलने के बजाय उनके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। संगठन आपराधिक प्रतिबंधों को ब्लैकमेल, हिंसा और सुरक्षा माँगने के डर जैसे जोखिमों से भी जोड़ता है।
Human Dignity Trust के कानूनी डेटाबेस के अनुसार, ऐसे आपराधिक प्रावधान चारों देशों में मौजूद हैं। चुने गए 15 देशों में ऐसे कानूनों वाला एक और देश है: कुवैत। घाना और कुवैत में संबंधित प्रतिबंध पुरुषों के बीच यौन संबंधों पर लागू होता है।
नाइजीरिया सरकार ने चुनाव परिणाम पर अपने 14 अक्टूबर के बयान में इसे मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता पर भरोसे का संकेत बताया। उसने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को धन्यवाद दिया और रचनात्मक संवाद, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा बुनियादी स्वतंत्रताओं की रक्षा का इरादा दोहराया।
परिषद में 47 देश हैं। संयुक्त राष्ट्र के नियम कहते हैं कि मतदान में उम्मीदवारों के मानवाधिकार संबंधी योगदान और स्वैच्छिक वादों को ध्यान में रखा जाए। चुने गए सदस्यों को इस क्षेत्र में सर्वोच्च मानकों का पालन करना और परिषद के साथ सहयोग करना चाहिए।


