पोलैंड की अदालत ने काया गोदेक को एलजीबीटी कार्यकर्ता बार्ट स्ताशेव्स्की से माफ़ी माँगने का आदेश दिया

वारसॉ की क्षेत्रीय अदालत ने 19 अक्टूबर 2026 को पोलैंड की रूढ़िवादी कार्यकर्ता काया गोदेक को एलजीबीटी कार्यकर्ता बार्ट स्ताशेव्स्की से माफ़ी माँगने का आदेश दिया। Onet के अनुसार, अदालत ने व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी दीवानी याचिका पर सुनवाई की। मामला 2021 में ल्यूब्लिन के समानता मार्च में गोदेक की एक टिप्पणी से जुड़ा था।
विवाद 23 अक्टूबर 2021 को पूर्वी पोलैंड के ल्यूब्लिन में हुआ था। गर्भपात का विरोध करने वाली और लाइफ़ ऐंड फ़ैमिली फ़ाउंडेशन का प्रतिनिधित्व करने वाली गोदेक ने स्ताशेव्स्की को बच्चों के यौन शोषण से जोड़ते हुए उनसे बात करने से इनकार कर दिया था। Wirtualna Polska ने उस समय वीडियो में दर्ज इस घटना की ख़बर दी थी। स्ताशेव्स्की ने उनकी बात को बेबुनियाद आरोप बताया।
स्ताशेव्स्की के बयान के अनुसार, उनका मानना था कि टिप्पणी से उनकी गरिमा, साख और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा। व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा से जुड़े इस मामले की संख्या IV C 44/25 है और इसकी सुनवाई न्यायाधीश अग्निएश्का देरेइचिक ने की। वादी के मुताबिक़, फ़ैसला दूरस्थ सुनवाई में सुनाया गया, जिसमें गोदेक शामिल नहीं हुईं।
मौखिक तर्कों के बारे में स्ताशेव्स्की के विवरण के अनुसार, न्यायाधीश ने कहा कि किसी पर आरोप लगाकर उससे अपनी सफ़ाई देने की माँग नहीं की जा सकती। कार्यकर्ता ने फ़ैसले का स्वागत किया और सार्वजनिक बहस में भाग लेने वालों की अपने शब्दों के प्रति ज़िम्मेदारी पर ज़ोर दिया। अदालत के तर्कों का यह विवरण वादी की ओर से दिया गया है।
Onet ने सितंबर 2022 में गोदेक का पक्ष प्रकाशित किया था। उस समय इसी विवाद से जुड़ा एक अलग आपराधिक मुक़दमा ल्यूब्लिन में निजी अभियोग के आधार पर चल रहा था। गोदेक ने तब कार्यवाही को अपनी Stop LGBT पहल का बदला बताया था और कहा था कि उन्होंने समझौते की पेशकश की थी। ये टिप्पणियाँ मौजूदा दीवानी फ़ैसले से पहले की हैं।
19 अक्टूबर के फ़ैसले के बारे में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, स्ताशेव्स्की से व्यक्तिगत रूप से या पत्र के ज़रिए माफ़ी माँगनी होगी। यह निचली अदालत का फ़ैसला है और अभी अंतिम नहीं है; दोनों पक्ष अपील कर सकते हैं।


