एलजीबीटी संगठन Zagreb Pride ने क्रोएशिया में हमलों की जांच में खामियां बताईं

क्रोएशिया के एलजीबीटी संगठन Zagreb Pride ने 11 अक्टूबर 2026 को एलजीबीटी लोगों पर हमलों के मामलों में पुलिस और न्यायिक अधिकारियों की कार्रवाई में खामियां बताईं। बयान अंतरराष्ट्रीय कमिंग आउट दिवस पर जारी किया गया, जो अपने यौन अभिविन्यास या लैंगिक पहचान के बारे में खुलकर बात करने से जुड़ा है।
संगठन ने 2021 से बयान जारी होने तक हिंसा की 35 घटनाओं का दस्तावेज़ीकरण किया। उसके आकलन में ये नफ़रत की मंशा से जुड़े आपराधिक कृत्य हो सकते हैं। इनमें आधे से अधिक मामलों में Zagreb Pride ने मंशा की पहचान या घटना के कानूनी वर्गीकरण में समस्याएं पाईं। निष्कर्ष संगठन के जुटाए मामलों तक सीमित हैं और देश में हुए सभी हमलों के आंकड़े नहीं हैं।
समाचार एजेंसी Tanjug के हवाले से Dunav televizija की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ऐसे मामलों की ओर इशारा करता है जिनमें हमलों को आपराधिक कृत्यों के बजाय सार्वजनिक व्यवस्था के मामूली उल्लंघन माना गया। उसका कहना है कि दूसरे मामलों में समलैंगिक या ट्रांस लोगों के प्रति नफ़रत की मंशा पर ध्यान नहीं दिया गया, जिससे हल्की सज़ाएं हुई होंगी। जांच की अप्रभाविता और पीड़ितों से संवाद में कमियां भी शिकायतों में शामिल हैं।
Zagreb Pride ने सबालिच बनाम क्रोएशिया मामले का हवाला दिया है। 14 जनवरी 2021 को यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय ने पाया कि अधिकारियों ने 2010 में उस महिला पर हुए हमले का समुचित जवाब नहीं दिया, जिसने हमलावर को बताया था कि वह लेस्बियन है। नफ़रत की मंशा जांचे बिना हमलावर पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने के लिए लगभग 40 यूरो का जुर्माना लगाया गया था। क्रोएशियाई अधिकारियों ने बाद में आपराधिक मुकदमा चलाने से इनकार को एक ही कृत्य के लिए दोबारा मुकदमा या सज़ा देने की मनाही से उचित ठहराया था। न्यायालय ने कहा कि शुरुआती कार्यवाही की बुनियादी खामियां मामले पर दोबारा विचार की अनुमति देती थीं और यूरोपीय मानवाधिकार अभिसमय के अनुच्छेद 3 के प्रक्रियात्मक दायित्वों का अनुच्छेद 14 के साथ उल्लंघन पाया।
ह्यूमन राइट्स हाउस ज़ाग्रेब ने 18 सितंबर को बताया कि उसने Zagreb Pride के साथ यूरोप की परिषद की मंत्रियों की समिति को संयुक्त प्रतिवेदन सौंपा है। लेखकों ने माना कि क्रोएशिया ने कानून बेहतर किए, नफ़रत से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई का प्रोटोकॉल अपनाया और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया। फिर भी उनके आकलन में इन उपायों ने ऐसी मंशाओं की लगातार पहचान और जांच सुनिश्चित नहीं की है। प्रतिवेदन यूरोपीय न्यायालय के फैसले के क्रियान्वयन की निगरानी के तहत दिया गया है।
Zagreb Pride ने संस्थाओं से हिंसा का सही कानूनी वर्गीकरण करने और संभावित नफ़रत की मंशा जांचने को कहा। संगठन ने पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने में मदद, कानूनी सहायता और प्रतिनिधित्व की पेशकश भी की।
Zagreb Pride, 10 जून 2023 की पुरानी तस्वीर। Mario Malcak / Wikimedia Commons, CC BY-SA 2.0। बिना क्रॉप किए आकार घटाकर WebP में बदला गया।
Uránia पहले पड़ोसी सर्बिया में एलजीबीटी लोगों पर हमलों से जुड़ी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रिपोर्टों पर लिख चुका है।


