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दक्षिण अफ्रीका में क्वीयर मुस्लिम संगठन ने दिवंगत इमाम मोहसिन हेंड्रिक्स की स्मृति में नए केंद्र का उद्घाटन किया

अल-गुरबा फाउंडेशन के कार्यवाहक निदेशक ज़ियाद फोलेंटाइन। फोटो: Ayanda Maphosa
अल-गुरबा फाउंडेशन के कार्यवाहक निदेशक ज़ियाद फोलेंटाइन। फोटो: Ayanda Maphosa

दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन उपनगर वाइनबर्ग में क्वीयर मुस्लिम अधिकार संगठन ‘अल-गुरबा फाउंडेशन’ (Al-Ghurbaah Foundation) ने एक नए स्थायी सामुदायिक केंद्र का उद्घाटन किया और अपने संस्थापक को श्रद्धांजलि अर्पित की। 19 सितंबर 2026 को आयोजित “विरासत और नवीनीकरण की एक शाम” नामक यह कार्यक्रम दुनिया के पहले घोषित समलैंगिक इमाम मोहसिन हेंड्रिक्स (Muhsin Hendricks) के जीवन और कार्यों को समर्पित था, जिनकी फरवरी 2025 में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

दक्षिण अफ्रीकी एलजीबीटीक्यू पत्रिका MambaOnline की रिपोर्ट के अनुसार , हेंड्रिक्स की हत्या के बाद अल-गुरबा को गंभीर संकट का सामना करना पड़ा था। घटना के कुछ ही दिनों के भीतर संगठन ने अपना किराए का परिसर खो दिया और डेढ़ साल से अधिक समय तक उसके पास कोई स्थायी पता नहीं था। वाइनबर्ग के ब्रॉड रोड पर स्थित यह नया केंद्र उन मुस्लिमों के लिए कार्यस्थल, सुरक्षित आश्रय और आध्यात्मिक केंद्र का काम करेगा जो अपने धार्मिक विश्वास को अपनी लैंगिक पहचान और यौन रुझान के साथ जोड़ना चाहते हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अल-गुरबा के कार्यवाहक निदेशक ज़ियाद फोलेंटाइन ने कहा कि नया केंद्र समुदाय के सामूहिक समर्पण से संभव हुआ है। उन्होंने हत्या की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग दोहराते हुए याद दिलाया कि हमलावर अभी भी फरार हैं और जांच में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। अमेरिका के एमोरी विश्वविद्यालय में इस्लामी अध्ययन के प्रोफेसर स्कॉट सिराज अल-हक कूगल ने वीडियो लिंक के माध्यम से जुड़कर कुरान की दयालु व्याख्या में हेंड्रिक्स के योगदान की सराहना की। केपटाउन के ‘लांगा प्राइड’ समूह की ब्रिजेट न्कोमाना ने भी एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि क्वीयर लोगों के धार्मिक जीवन में किसी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए।

इमाम मोहसिन हेंड्रिक्स ने 1996 में सार्वजनिक रूप से अपनी समलैंगिकता स्वीकार की थी, जिससे वे दुनिया के पहले खुले तौर पर समलैंगिक मुस्लिम धर्मगुरु बने। उसी वर्ष उन्होंने ‘द इनर सर्कल’ (बाद में अल-फ़ितरा फाउंडेशन) की स्थापना की, जिसके बाद उन्होंने अल-गुरबा और केपटाउन में समावेशी मस्जिद ‘मस्जिद-उल-गुरबा’ शुरू की, जहां महिला और पुरुष बिना किसी विभाजन के एक साथ नमाज़ अदा करते थे। उनके इन विचारों का दक्षिण अफ्रीका के रूढ़िवादी इस्लामी संगठनों, विशेष रूप से ‘मुस्लिम ज्यूडिशियल काउंसिल’ ने कड़ा विरोध किया और उनके विचारों को इस्लामी कानून के विपरीत बताया। फरवरी 2025 में 57 वर्षीय इमाम की गेबेखा (पूर्व पोर्ट एलिज़ाबेथ) के पास उस समय घात लगाकर हत्या कर दी गई जब दो नकाबपोश बंदूकधारियों ने उनकी कार पर गोलियां चलाईं।

इससे पहले ‘यूरेनिया’ ने दक्षिण अफ्रीका में एलजीबीटी समुदाय की स्थिति पर समाजशास्त्रीय रिपोर्ट और केपटाउन में समानता के प्रतीकों से जुड़े विवादों पर जानकारी दी थी।

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