पश्चिम अफ्रीका के एंग्लिकन धर्माध्यक्ष ने घाना में गे लोगों के आपराधिक मुकदमे का विरोध किया
पश्चिम अफ्रीका प्रांत के एंग्लिकन चर्च के प्रमुख सिरिल कोबिना बेन-स्मिथ ने 14 अगस्त 2026 को जारी BBC साक्षात्कार में कहा कि उनका चर्च प्रांत घाना में गे लोगों पर आपराधिक मुकदमा चलाने का समर्थन नहीं करता। दक्षिण अफ्रीकी LGBT मीडिया MambaOnline ने 22 अगस्त को इस बयान की खबर दी ।
आर्चबिशप ने कहा, “हमारे प्रांत में हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है: हम गे लोगों के अपराधीकरण का समर्थन नहीं करते।” साथ ही उन्होंने चर्च की इस पारंपरिक शिक्षा को दोहराया कि ईश्वर ने पुरुष और स्त्री की रचना की। यह पूछे जाने पर कि क्या गे ईसाइयों को चर्च में स्वीकार किया जाएगा, बेन-स्मिथ ने उन्हें ईश्वर की संतान बताया, जिनसे ईश्वर प्रेम करता है। उन्होंने कहा कि LGBT लोग लंबे समय से घाना में रहते आए हैं और “कभी समस्या नहीं रहे।” 76crimes ने भी उनकी मुख्य टिप्पणियाँ प्रकाशित कीं।
एंग्लिकन कम्यूनियन की आधिकारिक निर्देशिका के अनुसार, बेन-स्मिथ पश्चिम अफ्रीका प्रांत के चर्च के प्राइमेट और असांते-माम्पोंग के बिशप हैं। वह अपने प्रांत की स्थिति बता रहे थे, जिसमें क्षेत्र के कई देशों के धर्मप्रांत शामिल हैं; वह पूरे विश्वव्यापी एंग्लिकन कम्यूनियन की ओर से नहीं बोल रहे थे।
यह बयान 2022 में घाना के एंग्लिकन बिशपों द्वारा रखी गई स्थिति को आगे बढ़ाता है। उस समय उन्होंने मानव यौन अधिकार और पारिवारिक मूल्य विधेयक की सामान्य दिशा का समर्थन किया और समलैंगिक संबंधों को अस्वीकार करने की बात दोहराई, लेकिन कुछ आपराधिक दंडों को अत्यधिक कठोर बताया और उनकी समीक्षा की माँग की। बिशपों ने यह भी कहा कि विधेयक का इस्तेमाल LGBT लोगों पर हमले या उन्हें डराने के लिए न हो।
घाना का मौजूदा दंड कानून “प्रकृति के विरुद्ध शारीरिक संबंध” के लिए पहले से ही तीन साल तक की जेल का प्रावधान करता है; यह धारा सहमति से बने समलैंगिक संबंधों पर लागू की जाती है। संसद ने 29 मई को एक नया विधेयक पारित किया, जो समलैंगिक संबंधों और LGBT गतिविधियों के समर्थन या प्रचार पर दंड का दायरा बढ़ाता है। बाद में संसद अध्यक्ष ने प्रक्रिया के उल्लंघन का हवाला देते हुए पुनर्विचार की माँग की। Ghana News Agency के अनुसार , संसद इस प्रक्रिया को पूरा किए बिना 31 जुलाई को अवकाश पर चली गई।
विधेयक के समर्थकों का कहना है कि यह पारंपरिक पारिवारिक और सांस्कृतिक मानदंडों की रक्षा करता है। विरोधियों के अनुसार यह समानता, निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन करता है तथा हिंसा और भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है। Associated Press ने इन दोनों पक्षों को संक्षेप में प्रस्तुत किया है। 22 अगस्त तक विधेयक लागू नहीं हुआ था।


