“केयर की कामुकता” — नर्सिंग, किंक संस्कृति और आमूल सहमति पर एम. के. थेक्कुमकटिल की पुस्तक
आईसीयू नर्स चिकित्सा में संस्थागत हिंसा और किंक संस्कृति में आमूल सहमति की पड़ताल करती हैं।

14 जुलाई 2026 को अमेरिकी प्रकाशक The Feminist Press (सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क) ने अंग्रेजी में निबंध संग्रह The Sexuality of Care: On Nursing, Kink, and a Future Without Hospitals प्रकाशित किया। यह पुस्तक ट्रांसजेंडर लेखक और गहन देखभाल (आईसीयू) नर्स एम. के. थेक्कुमकटिल (M. K. Thekkumkattil) द्वारा लिखी गई है, जिसमें नारीवादी विचारक सोफी लुईस (Sophie Lewis) की प्रस्तावना शामिल है।
एम. के. थेक्कुमकटिल एक क्वीर, ट्रांस और दिव्यांग स्वास्थ्य कार्यकर्ता व लेखक हैं, जिनकी रचनाएं Black Warrior Review और smoke and mold जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान आईसीयू वार्डों में कार्य करते हुए थेक्कुमकटिल ने चिकित्सा प्रणाली के कठोर यथार्थ, अपनी पुरानी बीमारियों और लैंगिक पहचान की खोज को एक साथ जिया। इस व्यक्तिगत अनुभव ने इस संकलन को आकार दिया, जो संस्मरण, संस्थागत आलोचना और राजनीतिक घोषणापत्र का अनूठा संगम है।
पुस्तक का मुख्य तर्क अस्पताल में की जाने वाली देखभाल और किंक (kink) संस्कृति के तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित है। लेखक विश्लेषण करते हैं कि कैसे आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था नर्सिंग कर्मचारियों को रोगियों पर अनैच्छिक नियंत्रण करने के लिए विवश करती है—मरीजों को जबरन बांधने से लेकर उनकी शारीरिक स्वायत्तता को दरकिनार करने तक। पूर्व रोगियों को लिखे पत्रों में («प्रिय पीटर», «प्रिय जूलिया», «प्रिय एलिसन»), लेखक स्वास्थ्यकर्मियों के नैतिक अपराधबोध को उजागर करते हैं। अस्पताल की जबरन देखभाल के विपरीत, लेखक दर्शाते हैं कि बीडीएसएम और क्वीर किंक संस्कृतियों ने आमूल सहमति (radical consent) और प्रक्रिया के बाद की देखभाल (aftercare) के ऐसे नियम विकसित किए हैं जिनका औपचारिक चिकित्सा में अभाव है।
यह पुस्तक नर्सिंग में श्रम और नस्लीय शोषण के इतिहास पर भी प्रकाश डालती है। थेक्कुमकटिल नर्सिंग को केवल मातृत्व और त्याग का पर्याय मानने की रूढ़िवादिता को खारिज करते हैं और अमेरिका में प्रवासी नर्सों के शोषण को रेखांकित करते हैं। अंतिम अध्यायों में लेखक अस्पतालों के उन्मूलन (hospital abolition) और दिव्यांगता न्याय (disability justice) की वकालत करते हैं, ताकि देखभाल की मानवीय परंपरा संस्थागत बंधनों से मुक्त होकर फल-फूल सके।






