"The Hermaphrodites" — लिंग-निर्धारण के इतिहास पर मिशेल फूको की अप्रकाशित पांडुलिपि
लिंग के कानूनी और चिकित्सा इतिहास पर फूको की मरणोपरांत प्रकाशित पांडुलिपि।
2 जून 2026 को इतालवी प्रकाशक Giulio Einaudi editore ने फ्रांसीसी दार्शनिक मिशेल फूको (1926–1984) की पुस्तक Gli ermafroditi (The Hermaphrodites) प्रकाशित की, जिसका अनुवाद Duccio Sacchi ने किया है। यह एक पूर्व में अप्रकाशित पांडुलिपि है, जो लगभग 1975 से 1978 के बीच लिखी गई थी और फूको की मृत्यु के बाद उनके संग्रह में खोजी गई थी। मूल फ्रांसीसी संस्करण, जिसका शीर्षक Les hermaphrodites है, 2025 में पेरिस के Gallimard प्रकाशन द्वारा Henri-Paul Fruchaud और Arianna Sforzini के संपादन में प्रकाशित हुआ था। इतालवी संस्करण में Arianna Sforzini की प्रस्तावना और Éric Fassin की उत्तरकथा शामिल है।
मिशेल फूको (1926–1984) एक फ्रांसीसी दार्शनिक और विचारों के इतिहासकार थे, जो बीसवीं सदी के सर्वाधिक प्रभावशाली चिंतकों में से एक थे। उन्होंने सत्ता के तंत्र, चिकित्सा, मनोचिकित्सा और दंड-संस्थाओं की संरचना, तथा कामुकता के इतिहास की गहन जांच की। उनकी प्रमुख कृतियों में Discipline and Punish (1975) और The History of Sexuality शामिल हैं — यह एक बहु-खंडीय परियोजना थी जिसे वे 1984 में अपनी मृत्यु से पहले पूरा नहीं कर सके।
1970 के दशक के अंत में फूको ने The History of Sexuality के एक अलग खंड को उभयलिंगियों (hermaphrodites) को समर्पित करने की योजना बनाई थी। 1978 और 1979 के बीच उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस इरादे का उल्लेख किया। किंतु समय के साथ उन्होंने अपने शोध का रुख प्राचीन यूनानी और रोमन संस्कृति की ओर मोड़ लिया और यह परियोजना कभी पूरी नहीं हुई। पांडुलिपि उनके संग्रह में ही बनी रही।
इस पाठ में फूको सोलहवीं और सत्रहवीं सदी के फ्रांस से संबंधित कानूनी और चिकित्सा दस्तावेजों का विश्लेषण करते हैं, जो आधुनिक काल के आरंभ में उभयलिंगिता (hermaphroditism) से जुड़े थे। वे उस बदलाव को रेखांकित करते हैं जो एक पूर्व-आधुनिक व्यवस्था से हुआ — जिसमें व्यक्तियों को अपना प्रमुख लिंग “चुनने” की अनुमति थी — एक ऐसे चिकित्सा मॉडल की ओर, जिसमें अधिकारी वैज्ञानिक परीक्षण के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक “वास्तविक लिंग” निर्धारित करने का प्रयास करते थे। प्रकाशकों के अनुसार यह एकमात्र ऐसा पाठ है जिसमें फूको ने शारीरिक लिंग (anatomical sex) और कामुकता (sexuality) के बीच उस निर्णायक अंतर को — जो ऐतिहासिक और सैद्धांतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है — सीधे और विस्तार से विकसित किया है।
यह पांडुलिपि उसी कालखंड में फूको द्वारा रचित अन्य कृतियों से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है। 1974–75 में उन्होंने Collège de France में अपना व्याख्यान पाठ्यक्रम Les Anormaux (Abnormal) दिया, जिसमें उभयलिंगी यह समझाने के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में उभरे कि समाज शरीर और कामुकता के मानदंड किस प्रकार निर्मित करता है। 1978 में उन्होंने उन्नीसवीं सदी के एक फ्रांसीसी इंटरसेक्स व्यक्ति Herculine Barbin के संस्मरणों का संपादन और प्रस्तावना लिखी।
“हर्माफ्रोडाइट” (hermaphrodite) शब्द — जिसे आज चिकित्सा में “इंटरसेक्स” (intersex) से प्रतिस्थापित किया गया है — ऐतिहासिक रूप से ऐसे व्यक्ति को संदर्भित करता था जिसकी जैविक लिंग विशेषताएं मानक पुरुष/महिला विभाजन में नहीं आती थीं। फूको की रुचि स्वयं जीव-विज्ञान में उतनी नहीं थी, जितनी इस बात में कि समाज और राज्य उन लोगों के प्रति कैसी प्रतिक्रिया देते थे जिनके शरीर स्थापित मानदंडों से बाहर थे।