“Frivolity” — क्वीयर सौंदर्यशास्त्र, कैंप संस्कृति और आनंद की शक्ति पर जेहान डबरो की पुस्तक
एक कवयित्री छिछलेपन, क्वीयर सौंदर्यशास्त्र, कैंप संस्कृति और आनंद के संबंध की पड़ताल करती हैं।

अगस्त 2026 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी प्रेस (Columbia University Press) ने अपनी No Limits श्रृंखला के अंतर्गत जेहान डबरो (Jehanne Dubrow) की अंग्रेजी पुस्तक Frivolity: A Defense प्रकाशित की। कवयित्री, निबंधकार और साहित्य की शोधकर्ता डबरो की यह कृति गैर-गंभीर माने जाने वाले विषयों का एक व्यापक सांस्कृतिक और दार्शनिक अध्ययन प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक आनंद के प्रति सामाजिक पूर्वाग्रहों की जड़ों की पड़ताल करती है और दर्शाती है कि कैसे «छिछलेपन» या «हल्केपन» (frivolity) का ठप्पा ऐतिहासिक रूप से स्त्रीत्व, क्वीयर सौंदर्यशास्त्र और सांस्कृतिक प्रतिरोध से जुड़ा रहा है।
पुस्तक की लेखिका जेहान डबरो यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ टेक्सास (University of North Texas) में विशिष्ट शोध प्रोफेसर और रचनात्मक लेखन की प्रोफेसर हैं। उन्होंने फ्रॉस्टबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी से स्नातक, यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड से मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स (MFA) और यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का-लिंकन से अंग्रेजी साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। डबरो आघात, स्मृति और शरीर पर केंद्रित दस काव्य संग्रहों के साथ-साथ कई प्रशंसित निबंध पुस्तकों की लेखिका हैं, जिनमें Taste: A Book of Small Bites (2022) और आघात कविता पर केंद्रित मार्गदर्शिका The Wounded Line (2025) शामिल हैं। इस नई कृति में उनकी काव्यात्मक संवेदनशीलता सांस्कृतिक सिद्धांत और आत्मीय संस्मरण के साथ गहराई से जुड़ती है।
यह पुस्तक 101 परस्पर जुड़े हुए निबंधात्मक अंशों में संरचित है, जो विश्व साहित्य, कला और दैनिक जीवन के विस्तृत अभिलेखागार को खंगालती है। डबरो इस प्रश्न से शुरुआत करती हैं कि पश्चिमी बौद्धिक परंपरा में हमेशा गंभीर, उपयोगितावादी और कठोर दृष्टिकोण को ही सर्वोच्च क्यों माना गया, जबकि सजावटी, क्षणभंगुर या चंचल चीजों को तुच्छ कहकर खारिज कर दिया गया। प्राचीन जापानी साहित्यकार सेई शोनागोन की रचना द पिलो बुक और जेन ऑस्टिन के उपन्यासों से लेकर मोजार्ट की संगीतमय चंचलता, ग्रेटा गेरविग की फिल्म बार्बी और नोरा एफ्रॉन की रोमांटिक कॉमेडी तक, लेखिका दिखाती हैं कि कैसे पितृसत्तात्मक और प्यूरिटन सोच ने गंभीरता को सत्ता का साधन बनाकर आनंद को दोयम दर्जे पर धकेल दिया।
इस अध्ययन का एक केंद्रीय बिंदु यह सिद्ध करना है कि हल्केपन के आरोप का उपयोग ऐतिहासिक रूप से महिलाओं और क्वीयर लोगों को हाशिए पर धकेलने के लिए किया गया। सुसान सोंटाग के ऐतिहासिक निबंध Notes on “Camp” (1964) का सहारा लेते हुए डबरो विश्लेषण करती हैं कि कैसे क्वीयर संस्कृति ने कृत्रिमता, अतिशयोक्ति, पंखों के बोआ, लेस, चटक गुलाबी रंग और नाटकीयता को आत्म-सम्मान और विद्रोही व्यंग्य की भाषा में बदल दिया। कैंप और भड़कीलापन कोई सतही पलायनवाद नहीं है, बल्कि रूढ़िवादी विषमलैंगिक कठोरता के खिलाफ एक सचेत प्रतिरोध है। लेखिका नागरिक आंदोलनों में «रणनीतिक हल्केपन» (tactical frivolity) की अवधारणा की भी पड़ताल करती हैं, जहाँ विदूषक वेशभूषा और हास्य सत्ता के दमनकारी तंत्र को निरस्त्र कर देते हैं।
ये सैद्धांतिक विचार लेखिका के निजी अनुभवों से जीवंत होते हैं। डबरो बताती हैं कि कैसे परफ्यूमरी की जटिल कला में रुचि और इत्र प्रेमियों के समुदाय से जुड़ने ने उन्हें मानसिक आघात से उबरने और अपने शरीर से दोबारा जुड़ने में सहायता की। एक अन्य अध्याय में वह 2020 की शुरुआत में शुरू किए गए अपने «परफेक्ट स्किन वर्ष» को याद करती हैं, जहाँ महामारी से ठीक पहले चेहरे की देखभाल की दिनचर्या अलगाव और भय के दौर में एक अप्रत्याशित भावनात्मक सहारा बन गई। अंततः जेहान डबरो की यह पुस्तक गंभीर और तुच्छ के बीच के कृत्रिम विभाजन को तोड़ती है, और अशांत समय में आनंद, उत्सव और सौंदर्य को मानवीय गरिमा का अनिवार्य आधार घोषित करती है।






